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भगवंत मान मॉडल की बड़ी जीत, शिक्षा क्रांति की मिसाल बना पंजाब, ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ से 1100 से ज्यादा छात्र NEET-JEE में सफल

भगवंत मान मॉडल की बड़ी जीत, शिक्षा क्रांति की मिसाल बना पंजाब, ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ से 1100 से ज्यादा छात्र NEET-JEE में सफल

पंजाब में शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में शुरू की गई ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ पहल अब राज्य की शिक्षा व्यवस्था की नई पहचान बनती जा रही है। सरकार द्वारा राज्य के 23 जिलों में 118 स्कूल ऑफ एमिनेंस स्थापित किए गए हैं, जो आधुनिक सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई के दम पर कई प्राइवेट स्कूलों को भी पीछे छोड़ रहे हैं।

इन स्कूलों की सबसे बड़ी खासियत समान और समावेशी शिक्षा है। यहां समाज के हर वर्ग के बच्चे—चाहे वह किसी जज, उपायुक्त या रिक्शा चालक के हों—एक ही कक्षा में, एक ही माहौल में पढ़ाई कर रहे हैं। इससे न केवल शिक्षा में बराबरी सुनिश्चित हो रही है, बल्कि सामाजिक समरसता भी मजबूत हो रही है। आधुनिक स्मार्ट क्लासरूम, समृद्ध लाइब्रेरी, अत्याधुनिक लैब और स्वच्छ वातावरण इन स्कूलों को एक आदर्श शैक्षणिक संस्थान बनाते हैं।

शैक्षणिक परिणामों की बात करें तो स्कूल ऑफ एमिनेंस के छात्रों ने राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया है। इन स्कूलों के 848 छात्रों ने NEET और 310 छात्रों ने JEE जैसी कठिन परीक्षाओं में सफलता हासिल कर राज्य का नाम रोशन किया है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सरकारी स्कूल भी सही संसाधन और दिशा मिलने पर उत्कृष्ट परिणाम दे सकते हैं।

पंजाब की यह शिक्षा क्रांति यहीं नहीं रुकी। राज्य ने राष्ट्रीय मूल्यांकन सर्वेक्षण में भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए केरल को पीछे छोड़कर शीर्ष स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि पंजाब की बदली हुई शिक्षा नीति और मजबूत शैक्षणिक ढांचे को दर्शाती है।

कुल मिलाकर, स्कूल ऑफ एमिनेंस न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं, बल्कि यह साबित कर रहे हैं कि सरकारी स्कूल भी निजी स्कूलों से बेहतर परिणाम दे सकते हैं। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत, समान और उज्ज्वल भविष्य की नींव रख रही है।

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