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ईरान पर हमला मुश्किल: सऊदी, कतर और यूएई ने ट्रंप को दिया करारा झटका

ईरान पर हमला मुश्किल: सऊदी, कतर और यूएई ने ट्रंप को दिया करारा झटका

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा कूटनीतिक झटका लगा है। खाड़ी के तीन प्रमुख मुस्लिम देशों—सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)—ने साफ कर दिया है कि वे ईरान के खिलाफ किसी भी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के लिए अपनी जमीन, हवाई क्षेत्र या सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल नहीं करने देंगे। इस फैसले से अमेरिका का ईरान को लेकर सैन्य दबाव बनाने का प्लान कमजोर पड़ता दिख रहा है।

दरअसल, अमेरिका ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच रिजीम चेंज की नीति को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। वाशिंगटन नहीं चाहता कि ईरान परमाणु शक्ति बने और इसी वजह से वह लगातार तेहरान को चेतावनी देता रहा है। हाल के दिनों में अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपने युद्धपोत और विमान तैनात किए हैं और यूएसएस अब्राहम लिंकन जैसे जंगी बेड़े को पश्चिम एशिया भेजा गया है। इसके बावजूद अब सहयोगी देशों का समर्थन न मिलना अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

यूएई ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि वह अपने हवाई क्षेत्र, जमीन या समुद्री इलाकों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई के लिए नहीं होने देगा। यूएई ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा संकट का समाधान बातचीत, तनाव कम करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान से ही निकाला जाना चाहिए।

वहीं सऊदी अरब ने भी निजी तौर पर अमेरिका को सूचित कर दिया है कि उसके हवाई क्षेत्र या सैन्य अड्डों का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं किया जा सकता। यह फैसला इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि ईरान तक पहुंचने का सबसे सीधा रास्ता सऊदी हवाई क्षेत्र से होकर जाता है। इसके बंद होने से किसी भी सैन्य अभियान की जटिलता और लागत दोनों बढ़ जाएंगी।

इसी तरह कतर ने भी अमेरिका से दूरी बनाते हुए साफ कर दिया है कि वह अपने यहां मौजूद बड़े अमेरिकी सैन्य अड्डे अल-उदीद का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमले के लिए नहीं होने देगा। कतर ने अपने नागरिकों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही है।

इन तीनों देशों के रुख से साफ है कि वे क्षेत्र में युद्ध और अस्थिरता नहीं चाहते। उनका मानना है कि ईरान पर हमला पूरे पश्चिम एशिया को बड़े संघर्ष में झोंक सकता है। इस इनकार के बाद अमेरिका की रणनीति को बड़ा झटका लगा है, जबकि ईरान को अस्थायी तौर पर राहत मिलती नजर आ रही है। खाड़ी के ये देश अनजाने में ही सही, लेकिन फिलहाल ईरान की ढाल बनकर खड़े दिख रहे हैं।

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