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युवराज मेहता मौत केस: कोर्ट ने पूछा— नोएडा अथॉरिटी पर कार्रवाई क्यों नहीं?

युवराज मेहता मौत केस: कोर्ट ने पूछा— नोएडा अथॉरिटी पर कार्रवाई क्यों नहीं?

नोएडा के चर्चित युवराज मेहता मौत मामले में अब न्यायिक सख्ती साफ दिखाई देने लगी है। गौतमबुद्धनगर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने इस केस की सुनवाई के दौरान नोएडा अथॉरिटी की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए पुलिस से पूछा है कि जब घटनास्थल की जिम्मेदारी अथॉरिटी की थी, तो उसे अब तक आरोपी क्यों नहीं बनाया गया। कोर्ट की यह टिप्पणी प्रशासनिक लापरवाही की ओर सीधा इशारा मानी जा रही है।

यह मामला 16 जनवरी का है, जब सेक्टर-150 में एक पानी से भरे गहरे गड्ढे में कार डूबने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई थी। अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि जिस गड्ढे में हादसा हुआ, उसमें 2021 से पानी भरा हुआ था। इसके बावजूद, फंड स्वीकृत होने के बाद भी नोएडा अथॉरिटी ने उसे ठीक कराने में कोई रुचि नहीं दिखाई।

कोर्ट उस समय और ज्यादा नाराज हो गई, जब उसने जांच अधिकारी से बिल्डर द्वारा दी गई करीब 500 पन्नों की रिपोर्ट के बारे में पूछा। जांच अधिकारी ने स्वीकार किया कि उन्होंने रिपोर्ट अब तक पढ़ी ही नहीं है। इस पर कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते हुए जांच की गंभीरता पर सवाल खड़े किए। मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी और 2 फरवरी को तय की गई है।

घटना की रात का मंजर बेहद दर्दनाक था। युवराज की कार बेसमेंट के लिए खोदे गए प्लॉट में भरे पानी में समा गई थी। करीब 120 मिनट तक युवराज कार के अंदर फंसा रहा और मोबाइल की टॉर्च जलाकर अपने जिंदा होने का संकेत देता रहा। मौके पर पुलिस, दमकल विभाग और एसडीआरएफ के करीब 80 जवान मौजूद थे, लेकिन संसाधनों और समन्वय की कमी के कारण कोई ठोस रेस्क्यू नहीं हो सका।

इस दौरान युवराज के पिता राजकुमार मेहता अधिकारियों के सामने हाथ जोड़कर मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली। एक रेस्क्यू कर्मी पानी में उतरा जरूर, लेकिन ठंड और सरिया के डर से कुछ सेकंड में ही बाहर आ गया। आखिर में एक डिलीवरी बॉय मुनेंद्र सिंह ने साहस दिखाकर पानी में उतरने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

इस घटना ने खुद को उत्तर प्रदेश का ‘शो-विंडो’ बताने वाले गौतमबुद्धनगर की आपदा तैयारियों की पोल खोल दी। दो घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान न तो जिला प्रशासन का कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही नोएडा प्राधिकरण का कोई जिम्मेदार अफसर नजर आया।

फिलहाल पुलिस ने इस मामले में तीन बिल्डरों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन अदालत के सवालों के बाद अब निगाहें उन अधिकारियों पर टिकी हैं, जिनकी लापरवाही और उदासीनता ने एक युवा इंजीनियर की जान ले ली। यह केस अब सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि जवाबदेही और सिस्टम की विफलता का प्रतीक बनता जा रहा है।

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