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‘मिशन पंजाब’ पर अमित शाह का फोकस, नशे के मुद्दे पर AAP को घेरने की तैयारी

‘मिशन पंजाब’ पर अमित शाह का फोकस, नशे के मुद्दे पर AAP को घेरने की तैयारी

पांच राज्यों के चुनाव संपन्न होने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अब अपनी राजनीतिक रणनीति का फोकस पंजाब पर केंद्रित कर दिया है। इस कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में ‘मिशन पंजाब’ की शुरुआत की जा रही है, जिसके तहत राज्य में नशे के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। जानकारी के अनुसार, यह अभियान मई महीने से शुरू होगा और इसके तहत अमित शाह हर महीने पंजाब का दौरा करेंगे।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य राज्य में ड्रग्स के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ जन-जागरूकता फैलाना है। भाजपा का मानना है कि पंजाब लंबे समय से नशे की समस्या से जूझ रहा है, जिससे युवाओं और परिवारों पर गंभीर असर पड़ा है। ऐसे में पार्टी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाकर जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। इसके साथ ही आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा इस अभियान के जरिए राजनीतिक जमीन तैयार करने में भी जुट गई है।

सूत्रों के मुताबिक, इस अभियान के दौरान पूरे पंजाब में विभिन्न स्थानों पर यात्राएं निकाली जाएंगी, जिनमें राज्य और केंद्र के कई वरिष्ठ नेता भी शामिल होंगे। भाजपा नेताओं का कहना है कि पंजाब एक सीमावर्ती राज्य होने के कारण यहां ड्रग्स तस्करी की समस्या गंभीर है। ऐसे में अगर राज्य में भाजपा की सरकार बनती है तो ‘डबल इंजन’ की ताकत से इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा।

भाजपा इस अभियान के माध्यम से आम आदमी पार्टी की सरकार को भी घेरने की रणनीति बना रही है। पार्टी का आरोप है कि वर्तमान सरकार नशे की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण करने में विफल रही है। इसलिए इस मुद्दे को जनता के बीच प्रमुखता से उठाकर सरकार की कथित नाकामी को उजागर किया जाएगा।

गौरतलब है कि अमित शाह पहले भी पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान चलाने की योजना बना चुके हैं। वर्ष 2016 में, जब वह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, तब भी इस तरह की यात्रा का प्रस्ताव सामने आया था, लेकिन उस समय यह योजना अमल में नहीं आ सकी थी। अब एक बार फिर इस अभियान को नए सिरे से शुरू किया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा पंजाब में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए यह बड़ा दांव खेल रही है। पार्टी ने इस बार शिरोमणि अकाली दल से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। वहीं, कांग्रेस आंतरिक कलह से जूझ रही है और आम आदमी पार्टी सरकार को लेकर भी कई मुद्दों पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में भाजपा को पंजाब की सियासत में अपनी संभावनाएं मजबूत नजर आ रही हैं।

कुल मिलाकर, ‘मिशन पंजाब’ के जरिए भाजपा न केवल नशे के मुद्दे पर जनमत तैयार करना चाहती है, बल्कि इसे आगामी चुनावों के लिए एक अहम राजनीतिक एजेंडा बनाने की दिशा में भी काम कर रही है।

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