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लव-कुश मंदिर से लेकर राम मंदिर विवाद तक, अमृतसर से AAP का बड़ा सियासी संदेश

लव-कुश मंदिर से लेकर राम मंदिर विवाद तक, अमृतसर से AAP का बड़ा सियासी संदेश

पंजाब में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) ने धार्मिक, राजनीतिक और विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर अपनी रणनीति स्पष्ट की है। अमृतसर में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री भगवंत मान और AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने राज्य के विभिन्न समसामयिक विषयों पर अपनी बात रखी। इस दौरान अमृतसर में लव-कुश और माता जानकी मंदिर के निर्माण की घोषणा भी की गई।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अमृतसर धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण भूमि है, जहां श्री हरिमंदिर साहिब, भगवान वाल्मीकि धाम और अन्य कई पवित्र स्थल मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि इसी ऐतिहासिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए यहां लव-कुश और माता जानकी के नाम पर एक भव्य मंदिर का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना पर जल्द काम शुरू होगा और समय-समय पर इसकी प्रगति की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले का भी उल्लेख किया गया। अरविंद केजरीवाल ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब तक केवल निचले स्तर के कर्मचारियों की गिरफ्तारी हुई है, जबकि कथित तौर पर बड़े स्तर पर हुई वित्तीय गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच अभी बाकी है। उन्होंने दावा किया कि मामले में व्यापक जांच की आवश्यकता है ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके।

वहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से पार्टी के मंत्रियों, विधायकों और विधानसभा अध्यक्ष को बुलाया गया है और वे सभी वहां उपस्थित होकर धार्मिक संस्था की ओर से दिए जाने वाले सुझावों का सम्मान करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से तलब नहीं किया गया है।

मुख्यमंत्री ने हाल ही में वायरल हुए कथित वीडियो का भी जिक्र करते हुए कहा कि वह अपना पक्ष लिखित रूप में श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष रखेंगे। उन्होंने कहा कि संबंधित वीडियो और उससे जुड़े तथ्यों को भी धार्मिक संस्था को उपलब्ध कराया जाएगा ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा हो सके। उनका कहना था कि तकनीक के माध्यम से किसी भी व्यक्ति की छवि को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है, इसलिए तथ्यों के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।

भगवंत मान ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इस पूरे विवाद को राजनीतिक रंग देकर लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं और आस्था से जुड़े मामलों का राजनीतिक उपयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धर्म और राजनीति को अलग-अलग रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द के लिए आवश्यक है।

महाराष्ट्र के नांदेड़ साहिब ट्रस्ट से जुड़े मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों के संचालन में राजनीतिक हस्तक्षेप से बचना चाहिए और ऐसे ट्रस्टों का संचालन उन लोगों के हाथों में होना चाहिए जो धार्मिक और सामाजिक सेवा के उद्देश्य से कार्य करते हों। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पटियाला के काली माता मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था प्रशासनिक ढांचे के तहत संचालित होती है और उसका उद्देश्य केवल मंदिर और श्रद्धालुओं की सेवा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए AAP नेतृत्व ने एक ओर धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष रखा, वहीं दूसरी ओर विकास, पारदर्शिता और धार्मिक संस्थाओं के राजनीतिकरण के विरोध को भी प्रमुखता से सामने रखा। पार्टी ने संकेत दिया कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले वह इन मुद्दों को जनता के बीच प्रमुखता से उठाएगी।

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