मुख्य सामग्री पर जाएं
ब्रेकिंग न्यूज़
तरुण तेजपाल को बड़ा झटका! यौन उत्पीड़न केस में हाईकोर्ट ने ठहराया दोषी भगवंत सरकार कैबिनेट ने ‘पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) विधेयक-2026’ सहित कई जनहित के कार्यों को दी मंजूरी ‘क्या हमारी कीमत कीड़े-मकौड़ों से भी कम है?’ झारखंड के आंदोलनकारी छात्रों का फूटा गुस्सा किसी का कान फटा, किसी का कंधा खिसका’—एअर इंडिया फ्लाइट के यात्रियों ने सुनाई दहला देने वाली आपबीती हवा में हड़कंप! टर्बुलेंस में फंसी एअर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट, कई यात्री घायल पटना में बनेगा PM मोदी का मंदिर, बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड की बैठक में बड़ा फैसला CM योगी का बड़ा लक्ष्य, इस बार 5 करोड़ घरों पर फहराएगा तिरंगा भगवा वेश में प्रदर्शन पड़ा भारी! राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ केस दर्ज उमर खालिद की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को हाई कोर्ट का नोटिस SCO समिट के लिए पीएम मोदी को न्योता भेजने की तैयारी में पाकिस्तान, क्या इस्लामाबाद जाएंगे प्रधानमंत्री?

बंगाल राज्यसभा उपचुनाव: TMC छोड़ BJP में पहुंचे तीन नेता, जानिए क्या है कानूनी पेंच

बंगाल राज्यसभा उपचुनाव: TMC छोड़ BJP में पहुंचे तीन नेता, जानिए क्या है कानूनी पेंच

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में दल-बदल और राज्यसभा उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग ने राज्य की तीन रिक्त राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव कराने की घोषणा कर दी है। ये सीटें तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन सांसदों के इस्तीफे के बाद खाली हुई हैं, जिन्होंने पार्टी छोड़ने के साथ-साथ अपनी राज्यसभा सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया और बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया।

सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक ने पहले टीएमसी और फिर राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया। पार्टी छोड़ने के तुरंत बाद तीनों नेता बीजेपी में शामिल हो गए। अब भाजपा ने इन्हीं तीनों नेताओं को राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि ये नेता दोबारा राज्यसभा पहुंच सकते हैं, लेकिन इस बार भाजपा के प्रतिनिधि के रूप में।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण पहलू दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार यदि कोई राज्यसभा सांसद बिना इस्तीफा दिए किसी दूसरी पार्टी में शामिल होता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है। इसी कानूनी स्थिति से बचने के लिए तीनों नेताओं ने पहले राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दिया और उसके बाद भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इस प्रक्रिया ने उन्हें दोबारा चुनाव लड़ने का कानूनी रास्ता उपलब्ध कराया।

राज्यसभा उपचुनाव के परिणाम पर पश्चिम बंगाल विधानसभा का संख्या बल भी अहम भूमिका निभाएगा। राज्यसभा चुनाव में प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए निर्धारित प्राथमिक मतों की आवश्यकता होती है। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और विधानसभा में उपलब्ध समर्थन के आधार पर भाजपा अपने उम्मीदवारों की जीत को लेकर आश्वस्त दिखाई दे रही है। यदि पार्टी को अपेक्षित समर्थन मिलता है, तो तीनों उम्मीदवारों के उच्च सदन में दोबारा पहुंचने की संभावना मजबूत मानी जा रही है।

दूसरी ओर, टीएमसी के लिए यह घटनाक्रम राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर चुनौती बनकर उभरा है। पार्टी पहले ही अंदरूनी मतभेदों और गुटबाजी की चर्चाओं का सामना कर रही है। ऐसे में तीन वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफे और भाजपा में शामिल होने से राज्यसभा में पार्टी की संख्या प्रभावित हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी उपचुनाव केवल तीन सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक तस्वीर का भी संकेत हो सकता है।

Share This
अगला लेख → रोडवेज बसों में यात्रियों का टोटा, प्राइवेट वाहनों की चांदी!…

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *

बाज़ार
सेंसेक्स 78,499 -456 (-0.58%)
निफ्टी 24,571 -65 (-0.26%)
मौसम
28°C
Patchy rain nearby
💧 70% 💨 4 km/h
Dehradun