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ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी वाद मध्यस्थता से खत्म करें दोनों पक्ष,सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस दी, 14 जुलाई को मध्यस्थता के लिए वाराणसी में बुलाया

वाराणसी, 13 जुलाई 2026। वाराणसी के बहुचर्चित ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी विवाद में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। सर्वोच्च न्यायालय की ओर से लंबित मामलों के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए चलाए जा रहे “समाधान समारोह-2026” के तहत इस विवाद के पक्षकारों को भी मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया है। इसके तहत पक्षकारों […]

ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी वाद मध्यस्थता से खत्म करें दोनों पक्ष,सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस दी, 14 जुलाई को मध्यस्थता के लिए वाराणसी में बुलाया

वाराणसी, 13 जुलाई 2026। वाराणसी के बहुचर्चित ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी विवाद में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। सर्वोच्च न्यायालय की ओर से लंबित मामलों के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए चलाए जा रहे “समाधान समारोह-2026” के तहत इस विवाद के पक्षकारों को भी मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया है। इसके तहत पक्षकारों को 14 जुलाई को वाराणसी में आयोजित मध्यस्थता प्रक्रिया में उपस्थित होने का आग्रह किया गया है। हालांकि यह प्रक्रिया पूरी तरह स्वैच्छिक है और इसमें शामिल होना किसी भी पक्ष के लिए बाध्यकारी नहीं है।

ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी विवाद से जुड़े हिंदू और मुस्लिम पक्षों ने इस प्रस्ताव पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। हिंदू पक्ष के कुछ वादकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे पूरे ज्ञानवापी परिसर से जुड़े अपने दावों पर न्यायालय से अंतिम निर्णय चाहते हैं और केवल आंशिक समाधान के पक्ष में नहीं हैं। वहीं मुस्लिम पक्ष ने भी मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार कर दिया है।

अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने एक पत्र जारी कर कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय की ओर से भेजा गया आमंत्रण बाध्यकारी नहीं है। समिति ने निर्णय लिया है कि वह किसी भी स्तर पर इस समाधान समारोह या मध्यस्थता प्रक्रिया में भाग नहीं लेगी। समिति का कहना है कि यह कार्यक्रम लंबित मामलों के आपसी सहमति से निस्तारण के लिए है, लेकिन ज्ञानवापी जैसा अत्यंत संवेदनशील और जटिल मामला मध्यस्थता के बजाय न्यायिक निर्णय के माध्यम से ही तय होना चाहिए।

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शुरू किया गया “समाधान समारोह-2026” देशभर में लंबित मामलों का सहमति के आधार पर निस्तारण कराने की एक पहल है। इस कार्यक्रम के तहत इच्छुक पक्षकार विशेष लोक अदालत के माध्यम से अपने विवादों का समाधान कर सकते हैं। यह पूरी प्रक्रिया सहमति आधारित है और किसी भी पक्ष पर इसमें शामिल होने का कानूनी दायित्व नहीं है। विशेष लोक अदालत का आयोजन 21 से 23 अगस्त 2026 के बीच प्रस्तावित है।

जानकारी के अनुसार, ज्ञानवापी विवाद के अलावा मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह तथा संभल की जामा मस्जिद से जुड़े मामलों के पक्षकारों को भी इसी पहल के तहत आमंत्रित किया गया था। हालांकि इन मामलों में भी दोनों पक्षों ने मध्यस्थता के बजाय न्यायालय से अंतिम फैसला लेने की इच्छा जताई है।

ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी विवाद फिलहाल विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन है। ऐसे में अब यह स्पष्ट हो गया है कि दोनों प्रमुख पक्षों के मध्यस्थता से पीछे हटने के बाद मामले का भविष्य न्यायालय में होने वाली आगे की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया पर ही निर्भर करेगा।

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