पेपर लीक पर योगी सरकार का सख्त रुख, 2027 चुनाव से पहले BJP ने बनाया बड़ा मुद्दा
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मुद्दों और नैरेटिव को लेकर अभी से तैयारियां तेज होती दिख रही हैं। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को घेरने के लिए भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को प्रमुखता से उठाना शुरू किया है। हालिया घटनाक्रम में छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड के मामलों का हवाला देते हुए बीजेपी ने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल खड़े किए हैं।
15 सितंबर को नई दिल्ली में बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तत्कालीन OSD चेतन बोर्घरिया की गिरफ्तारी और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व सहयोगी चंदन सिंह जीना से जुड़े ED मामले का उल्लेख किया। बीजेपी ने इन दोनों मामलों को भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मुद्दे से जोड़ते हुए कांग्रेस से जवाब मांगा।
छत्तीसगढ़ मामले में ED ने 11 सितंबर 2026 को चेतन बोर्घरिया को गिरफ्तार किया। ED के मुताबिक, यह कार्रवाई CGPSC की 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और हेरफेर से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत हुई है। बोर्घरिया उस समय मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD थे और फिलहाल बलरामपुर-रामानुजगंज में अपर कलेक्टर के पद पर तैनात थे। एजेंसी ने कहा है कि जांच में डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े तथ्य सामने आए हैं।
वहीं उत्तराखंड में ED ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व निजी सहायक चंदन सिंह जीना से जुड़े परिसरों पर कार्रवाई की थी। यह जांच 2016 में आयोजित ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से संबंधित है। रिपोर्टों के मुताबिक, तलाशी के दौरान नकदी, सोना और महंगी घड़ियां बरामद होने की बात सामने आई। इसके बाद हरीश रावत ने कांग्रेस के दो पदों से इस्तीफा दिया। हालांकि, रावत ने अपने ऊपर लगे किसी भी आरोप से इनकार करते हुए कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।
इन दोनों मामलों को आधार बनाकर बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी से सवाल किया कि जो वह युवाओं, बेरोजगारी और परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के मुद्दे उठाते हैं, क्या उन्हें कांग्रेस से जुड़े मामलों पर भी जवाब नहीं देना चाहिए। बीजेपी ने कांग्रेस के ‘मोहब्बत की दुकान’ वाले राजनीतिक संदेश पर भी हमला किया और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पार्टी नेतृत्व को घेरा।
उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक का मुद्दा पहले से ही महत्वपूर्ण राजनीतिक विषय रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई को अपनी प्राथमिकताओं में बताती रही है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के लिए विपक्षी दलों के शासन वाले राज्यों में सामने आए परीक्षा और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को यूपी की राजनीति में उठाना एक संभावित चुनावी मुद्दा बन सकता है।
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच उत्तर प्रदेश में राजनीतिक तालमेल और विपक्षी मुद्दों को लेकर रणनीति भी चुनावी राजनीति का अहम हिस्सा रहने वाली है। ऐसे में यदि बेरोजगारी, भर्ती परीक्षा और पेपर लीक जैसे मुद्दे चुनावी बहस में प्रमुख होते हैं, तो दोनों पक्ष अपने-अपने शासन और राज्यों के उदाहरणों के जरिए जनता के सामने अपना पक्ष रख सकते हैं।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि 2027 के यूपी चुनाव में कौन-सा मुद्दा सबसे प्रमुख बनेगा। लेकिन हालिया घटनाक्रम से इतना जरूर स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितता और पेपर लीक को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और आने वाले समय में ये मुद्दे यूपी की चुनावी बहस का हिस्सा बन सकते हैं।