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वाराणसी – ज्ञानवापी मस्जिद का होगा ASI से सर्वे,वजु स्थल छोड़कर बाकी कैम्पस की होगी जांच

वाराणसी – ज्ञानवापी मस्जिद का होगा ASI से  सर्वे,वजु स्थल छोड़कर बाकी कैम्पस की होगी जांच

वाराणसी – ज्ञान‌‌‌वापी केस में ASI सर्वे की इजाजत मिल गई है। वाराणसी कोर्ट ने शुक्रवार को अपने फैसले में कहा कि वजु स्थल को छोड़कर बाकी पूरे कैंपस का बिना नुकसान पहुंचाए साइंटिफिक सर्वे किया जाए। जिला जज ने ASI डायरेक्टर को 4 अगस्त को कोर्ट में पेश होने को कहा है। उन्हें कोर्ट को बताना होगा कि वो ये सर्वे कैसे करेंगे।

वही कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी है। मुस्लिम पक्ष ने फैसले के विरोध में हाईकोर्ट में अपील करने की बात कही है।

वाराणसी कोर्ट में 14 जुलाई को हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा था- ज्ञानवापी आदिविश्वेश्वर का मूल स्थान है। यह लाखों लोगों की भावनाओं से जुड़ा है। सर्वे के दौरान पश्चिमी दीवार पर मिले निशान और अवशेषों से लगता है कि यह मंदिर की दीवार है।

ओरल एवीडेंस के आधार पर कोई पक्ष नहीं रखा जा सकता, इसलिए सर्वे अनिवार्य है। हम संपूर्ण परिसर के सर्वे की मांग करते हैं, जिससे सभी को पता चलेगा कि यह परिसर स्वयंभू आदिविश्वेवर मंदिर है। मंदिर को लेकर बताने वाला कोई जिंदा नहीं है, लेकिन इतिहास है, जो बहुत कुछ कह रहा है। सर्वे के बाद वाराणसी का इतिहास सामने होगा।

मुस्लिम पक्ष ने अपनी और दी गयी दलील में कहा की यहां पहले से मस्जिद थी, किसी धार्मिक स्थल की जगह नहीं बनाया कोर्ट ने दोनों पक्षों की बात सुनकर फैसला सुरक्षित कर लिया था। जिला जज से हिंदू पक्ष के एडवोकेट ने निवेदन किया था कि ज्ञानवापी परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराना जरूरी है। इससे सनातनी हिंदुओं में तनावपूर्ण वातावरण व्याप्त है। ज्ञानवापी मामले को लेकर उपजे तनाव का सौहार्दपूर्ण समाधान वैज्ञानिक तथ्य सामने आने पर हो जाएगा। मुस्लिम पक्ष को भी इस पर तैयार होना चाहिए और सर्वे से किसी भी तरह की वर्तमान स्थिति को क्षति नहीं होगी।

हिंदू पक्ष के एडवोकेट ने निवेदन किया था कि आर्कियोलॉजी के एक्सपर्ट रडार पेनिट्रेटिंग, एक्सरे पद्धति, रडार मैपिंग, स्टाइलिस्ट डेटिंग कर सकते हैं।
स्टाइलिस्ट डेटिंग में किसी संरचना के निर्माण शैली से उसकी सदियों पुराने स्थिति का आकलन किया जाता है। इसमें पुरातत्व के विशेषज्ञ प्रूफ कर देते हैं कि संबंधित संरचना किस दौर की है। ज्ञानवापी परिसर में किस दौर में कौन-सी संरचना से मंदिर बना था, यह भी रिपोर्ट में होगा।

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