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अरविंद केजरीवाल के लिए फिर लकी रहेगा वैलेंटाइन वीक ? क्या इस बार भी दिल्ली देगी साथ ?

अरविंद केजरीवाल के लिए फिर लकी रहेगा वैलेंटाइन वीक ? क्या इस बार भी दिल्ली देगी साथ ?

दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे एक बार फिर वैलेंटाइन वीक के दौरान आ रहे हैं, और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल के लिए यह संयोग हमेशा से लकी साबित हुआ है। इस बार भी 8 फरवरी को मतगणना होनी है, जो वैलेंटाइन वीक के दूसरे दिन यानी प्रपोज डे पर पड़ रही है। दुनिया भर में इस दिन को प्रेमी-प्रेमिकाएं एक-दूसरे से प्यार का इजहार करने के लिए चुनते हैं।

दिल्ली चुनाव के परिणाम और वैलेंटाइन वीक का यह संयोग पहले भी देखा गया है। 2013, 2015 और 2020 में अरविंद केजरीवाल की पार्टी को जब भी जीत मिली, तब यह समय वैलेंटाइन वीक के आसपास ही था। दिलचस्प बात यह है कि इस बार के चुनावों में अरविंद केजरीवाल के लिए परिस्थितियां कठिन मानी जा रही हैं। अब तक आए 14 में से 12 एग्जिट पोल के मुताबिक, आम आदमी पार्टी को बड़ा नुकसान होता दिख रहा है और उसे हार का सामना करना पड़ सकता है।

अरविंद केजरीवाल को पहली बार 2013 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में बड़ी सफलता मिली थी। हालांकि, उस चुनाव के बाद बनी उनकी सरकार सिर्फ 49 दिन चली और 14 फरवरी 2014 को उन्होंने इस्तीफा दे दिया। वैलेंटाइन वीक का आखिरी दिन यानी 14 फरवरी उनके राजनीतिक सफर में एक अहम तारीख बन गई।

इसके बाद, 2015 के चुनाव में उनकी पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की और 67 सीटों पर कब्जा जमाया। अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए खासतौर पर 14 फरवरी का दिन चुना और जनता से अपने प्रेम और समर्थन को बनाए रखने की अपील की।

2020 के चुनाव में भी आम आदमी पार्टी को इसी हफ्ते के दौरान जीत मिली, हालांकि इस बार शपथ ग्रहण 16 फरवरी को हुआ था।

इतना ही नहीं, 2022 में पंजाब और गोवा में हुए विधानसभा चुनावों में भी 14 फरवरी को मतदान हुआ था। पंजाब में आम आदमी पार्टी ने शानदार जीत दर्ज कर सरकार बनाई, जबकि गोवा में भी अच्छा प्रदर्शन किया।

अरविंद केजरीवाल का राजनीतिक सफर

अरविंद केजरीवाल ने आईआईटी खरगपुर से पढ़ाई करने के बाद इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) में नौकरी की। इस दौरान वे सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे और ‘परिवर्तन’ नामक एनजीओ चलाया। बताया जाता है कि राजनीति को समझने के लिए उन्होंने एक बार दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के घर भी समय बिताया था।

2011 में अन्ना हजारे के नेतृत्व में चले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में वे सबसे आगे रहे। यह आंदोलन जनलोकपाल की मांग को लेकर था और देशभर में इसकी गूंज सुनाई दी। आंदोलन के बाद अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी (AAP) की स्थापना की और 2013 में पहली बार दिल्ली के चुनावी मैदान में उतरे।

आज आम आदमी पार्टी के दिल्ली, पंजाब और गुजरात सहित कई राज्यों में विधायक हैं। संसद में भी पार्टी के 10 राज्यसभा और 3 लोकसभा सांसद हैं।

अब 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे 8 फरवरी को आ रहे हैं। देखना होगा कि क्या इस बार भी वैलेंटाइन वीक अरविंद केजरीवाल के लिए सौभाग्यशाली साबित होता है या नहीं

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