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दिल्ली कैबिनेट ने लिया बड़ा कदम, स्कूल फीस अधिनियम को दी हरी झंडी

दिल्ली कैबिनेट ने लिया बड़ा कदम, स्कूल फीस अधिनियम को दी हरी झंडी

दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में एक अहम फैसला लिया गया है। दिल्ली कैबिनेट ने “दिल्ली स्कूल एजुकेशन ट्रांसपेरेंसी इन फिक्सेशन एंड रेगुलेशन ऑफ फीस 2025” नामक बिल को मंजूरी दे दी है, जिससे निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने पर सख्त रोक लगेगी। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि इस बिल को पास कराने के लिए दिल्ली विधानसभा का आपातकालीन सत्र बुलाया जाएगा और इसे तुरंत लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से पेरेंट्स में स्कूल फीस को लेकर असंतोष था। जब जिलाधिकारियों से जांच करवाई गई, तब सामने आया कि अब तक कोई ऐसा कानून नहीं था जो स्कूलों को फीस बढ़ाने से रोक सके। अब कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए इस बिल के जरिए फीस नियंत्रण के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं।

भाजपा नेता आशीष सूद ने भी इस फैसले की सराहना की और बताया कि सरकार ने पेरेंट्स की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कार्यवाही शुरू की है। अब एक त्रिस्तरीय समिति के माध्यम से स्कूलों की फीस का निर्धारण किया जाएगा। इसमें पेरेंट्स की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। प्रत्येक समिति में एक एससी/एसटी सदस्य और दो महिलाएं होना अनिवार्य है। यह समिति तीन वर्षों तक फीस वृद्धि या कटौती पर निर्णय लेगी।

31 जुलाई तक इस समिति का गठन कर दिया जाएगा और 30 दिनों के भीतर उसे अपनी रिपोर्ट देनी होगी। अगर समिति समय पर निर्णय नहीं ले पाती है, तो मामला जिला स्तरीय समिति के पास जाएगा जिसे 30 से 45 दिन का समय मिलेगा। फिर भी यदि समाधान नहीं निकलता है तो यह विषय राज्य स्तरीय समिति को सौंपा जाएगा।

बिल के तहत यह भी प्रावधान है कि यदि स्कूल बिना समिति की अनुमति के फीस बढ़ाते हैं, तो उन पर ₹1,10,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा सरकार को ऐसे स्कूलों का टेकओवर करने का अधिकार भी प्राप्त होगा। यदि कमेटी के निर्णय से पेरेंट्स संतुष्ट नहीं हैं तो 15% अभिभावकों की शिकायत पर मामला सीधे जिला समिति को सौंपा जा सकेगा।

यह नया कानून पास होने के बाद निजी स्कूलों की फीस पर सख्त नियंत्रण लागू होगा, जिससे पेरेंट्स को बड़ी राहत मिलेगी और मनमानी फीस वसूली पर लगाम लग सकेगी।

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