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ग्रेटर नोएडा की शारदा यूनिवर्सिटी ने भी तुर्की से नाता तोड़ लिया है, हर साल आते थे छात्र पढ़ने

ग्रेटर नोएडा की शारदा यूनिवर्सिटी ने भी तुर्की से नाता तोड़ लिया है, हर साल आते थे छात्र पढ़ने

ग्रेटर नोएडा: भारत-पाक के बीच हाल ही में हुए तनाव के दौरान तुर्की के रुख को लेकर देश में नाराजगी बनी हुई है। भले ही हालात अब सामान्य हो गए हों, लेकिन तुर्की के प्रति गुस्सा खत्म नहीं हुआ है। इसी क्रम में ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा यूनिवर्सिटी ने तुर्की की दो यूनिवर्सिटियों के साथ अपने शैक्षणिक संबंध समाप्त कर दिए हैं।

क्या है मामला?
शारदा यूनिवर्सिटी ने तुर्की की Istanbul Aydin University और Hasan Kalyoncu University से अपनी पार्टनरशिप खत्म कर दी है। इन विश्वविद्यालयों से हर साल छात्र शारदा यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए भारत आते थे। लेकिन अब यह अकादमिक सहयोग नहीं रहेगा।

इससे पहले जामिया मिलिया इस्लामिया, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) ने भी तुर्की के साथ अपने शैक्षणिक संबंधों को खत्म कर दिया था। जुलाई में नया सत्र शुरू होने वाला है, लेकिन उससे पहले ही शारदा यूनिवर्सिटी ने यह फैसला ले लिया।

तुर्की के खिलाफ माहौल क्यों है?
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद देशभर में तुर्की के खिलाफ माहौल बना हुआ है। दरअसल, भारत-पाकिस्तान तनाव के समय तुर्की ने खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया था। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से फोन पर बात की, कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के नजरिए का समर्थन किया और पाकिस्तान को ड्रोन व हथियार भी मुहैया कराए।

एर्दोगन ने कश्मीर को लेकर भारत की नीति की आलोचना की और अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग का समर्थन किया। तुर्की लंबे समय से कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ खड़ा रहा है। इसके चलते भारत और तुर्की के रिश्तों में खटास आ गई है। वहीं भारत ने इसराइल और ग्रीस जैसे देशों के साथ अपने संबंध मजबूत किए हैं, जो तुर्की के विरोध में माने जाते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद भारतीय शैक्षणिक संस्थानों ने तुर्की से दूरी बनानी शुरू कर दी है और अब शारदा यूनिवर्सिटी भी इस सूची में शामिल हो गई है।

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