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बकरा ही क्यों मुर्गा और भैंस भी मत काटो – डॉ एसटी हसन

बकरा ही क्यों मुर्गा और भैंस भी मत काटो – डॉ एसटी हसन

बकरीद पर होने वाली कुर्बानी को लेकर पूर्व सांसद डॉ. एस.टी. हसन ने विश्व हिंदू परिषद की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसी बयानबाज़ी से हिन्दू-मुस्लिम एकता को चोट पहुंचती है और इससे देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब खतरे में पड़ती है। पूर्व सांसद ने कहा कि कुर्बानी की परंपरा केवल मुसलमानों की नहीं, बल्कि हिंदुओं में भी बलि की परंपरा रही है। ऐसे में एकतरफा विरोध करना दुर्भावनापूर्ण है।

उन्होंने कहा कि यदि कुर्बानी को ही प्रदूषण या हिंसा का स्रोत माना जा रहा है, तो फिर देशभर में चिकन, मटन, बीफ़ की दुकानों पर भी रोक लगनी चाहिए।
डॉ. हसन ने कहा कि कुछ संगठन सिर्फ नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं, जिससे समाज में दरारें गहरी हो रही हैं। यह रवैया देश की एकता के लिए ख़तरनाक है। उन्होंने आरोप लगाया कि हर त्योहार पर मुसलमानों को निशाना बनाया जाता है, जो एक साजिश के तहत हो रहा है ताकि सांप्रदायिक तनाव को भड़काया जा सके।

डॉ. हसन ने कहा कि एक धर्मगुरु द्वारा बकरे की कुर्बानी को ‘दुष्टता’ कहना न सिर्फ अपमानजनक है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का भी अपमान है एसटी हसन का आरोप: “हर बार मुसलमानों के त्योहार को निशाना बनाते हैं उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजन को बहस का मुद्दा बना देना एक रणनीति बन चुकी है, जिससे देश की अखंडता को नुक़सान पहुंच रहा है।

पूर्व सांसद ने कहा कि जिस तरह से कुर्बानी के नाम पर विवाद खड़ा किया जा रहा है, वह दरअसल हिन्दू-मुस्लिम रिश्तों को बिगाड़ने का प्रयास है डॉ. हसन ने कहा कि जब खुद केंद्र सरकार के मंत्री बीफ खाने की बात करते हैं, तो फिर सिर्फ मुसलमानों को टारगेट करना दोगलापन नहीं तो और क्या है?

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