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नीतीश की 20 साल पुरानी पकड़ ढीली, बिहार का असली पॉवर सेंटर अब बीजेपी

नीतीश की 20 साल पुरानी पकड़ ढीली, बिहार का असली पॉवर सेंटर अब बीजेपी

बिहार की नई सरकार बनने के बाद राजनीति का असली संकेत विभागों के बंटवारे से साफ दिखाई देता है। नीतीश कुमार भले ही दसवीं बार मुख्यमंत्री बन गए हों, लेकिन सत्ता का संतुलन इस बार पूरी तरह बदल चुका है। पटना में 26 मंत्रियों ने शपथ ली, जिनमें सबसे ज़्यादा संख्या बीजेपी की थी। जेडीयू के मुकाबले बीजेपी के ज़्यादा मंत्री, ज़्यादा नए चेहरे और सबसे अहम—सबसे ताकतवर गृह मंत्रालय भी अब बीजेपी के पास पहुँच गया है।

यह वही विभाग है जिसे नीतीश कुमार ने लगभग 20 साल तक अपने पास रखा। पुलिस, लॉ-एंड-ऑर्डर, इंटेलिजेंस—इन सब पर सीधा अधिकार गृह मंत्रालय का होता है। पहली बार यह विभाग बीजेपी के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को दे दिया गया। यह बदलाव सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि बिहार की सत्ता की दिशा तय करने वाला कदम है। वर्षों से चला आ रहा ‘बड़े भाई–छोटे भाई’ वाला फार्मूला इस फैसले के साथ खत्म माना जा रहा है। चुनाव से पहले ही बीजेपी और जेडीयू ने 101-101 सीटों पर लड़कर संकेत दे दिया था कि अब दोनों बराबर हैं, और अब विभागों में बीजेपी की बढ़त उस संकेत को वास्तविकता में बदल रही है।

नीतीश कुमार ने सामान्य प्रशासन, कैबिनेट सचिवालय और सतर्कता जैसे विभाग अपने पास रखे हैं, जो मुख्यतः नौकरशाही से जुड़े कामों को संभालते हैं। वहीं बीजेपी ने अपने मंत्रिमंडल में भारी फेरबदल करते हुए 9 नए चेहरों को जगह दी है। यह वही BJP है जिसने पिछले कुछ सालों में नीतीश सरकार पर बार-बार कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए थे। अब वही विभाग खुद के नियंत्रण में लेकर बीजेपी अपनी “कानून व्यवस्था सख्त” छवि को मजबूत करना चाहती है।

गृह मंत्रालय मिलने के बाद बीजेपी के पास पुलिसिंग, इंटेलिजेंस और सुरक्षा से जुड़े फैसलों पर सीधा नियंत्रण होगा। सीमांचल और सीमा पार घुसपैठ जैसे मामलों पर केंद्र और राज्य के बीच तालमेल और मजबूत होने की उम्मीद है। अमित शाह की ‘ज़ीरो टॉलरेंस टू क्राइम’ नीति को अब बिहार में और कड़े तरीके से लागू किए जाने की संभावना जताई जा रही है। यही वजह है कि विपक्ष, खासकर आरजेडी, के बीच यह चर्चा तेज है कि अब उन पर सख्ती बढ़ सकती है।

सरकार का मुखिया भले नीतीश कुमार हों, लेकिन बागडोर किसके हाथ है, यह विभागों की सूची बता देती है। गृह मंत्रालय, राजनीतिक बातचीत, विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव और भविष्य की सत्ता-साझेदारी—हर जगह बीजेपी की पकड़ अब पहले से कहीं मजबूत हो चुकी है। बीस साल के बाद पहली बार बिहार की राजनीति में तस्वीर साफ है—नीतीश कुमार चेहरे हैं, लेकिन ताकत BJP की बढ़ चुकी है।

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