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‘सपा सारी टिकटें मुस्लिमों को दे दे…’ संसद में Amit Shah का तंज, बढ़ी सियासी गर्मी

‘सपा सारी टिकटें मुस्लिमों को दे दे…’ संसद में Amit Shah का तंज, बढ़ी सियासी गर्मी

संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर जोरदार बहस देखने को मिली, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आए। इस बहस के केंद्र में जनगणना, महिला आरक्षण और पिछड़े वर्गों के लिए अलग कोटे की मांग जैसे मुद्दे रहे। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah (अमित शाह) और समाजवादी पार्टी के प्रमुख Akhilesh Yadav (अखिलेश यादव) के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।

लोकसभा में चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी की ओर से सांसद धर्मेंद्र यादव ने संविधान संशोधन और परिसीमन से जुड़े विधेयकों का विरोध किया। उन्होंने मांग उठाई कि महिला आरक्षण में पिछड़ी जातियों की महिलाओं के लिए अलग से कोटा सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही सपा ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया से अलग क्यों कर रही है।

इसी मुद्दे पर बोलते हुए Akhilesh Yadav (अखिलेश यादव) ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जनगणना क्यों नहीं कराई जा रही है। उन्होंने संकेत दिया कि बिना सही आंकड़ों के आरक्षण का सही लाभ तय करना मुश्किल होगा।

इन सवालों का जवाब देते हुए Amit Shah (अमित शाह) ने कहा कि देश में जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सरकार ने इस बार जातिगत जनगणना कराने का निर्णय लिया है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रही है।

बहस के दौरान माहौल उस वक्त और गरम हो गया जब धर्मेंद्र यादव की ओर से मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग उठाई गई। इस पर पलटवार करते हुए Amit Shah (अमित शाह) ने कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना पूरी तरह असंवैधानिक है और भारतीय संविधान इसकी अनुमति नहीं देता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि समाजवादी पार्टी चाहे तो अपने सभी चुनावी टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है, इसमें उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

गृह मंत्री ने यह भी कहा कि अगर समाजवादी पार्टी के हाथ में होता तो वह समाज को जातियों के आधार पर और ज्यादा विभाजित कर देती। वहीं विपक्ष का कहना है कि सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए पिछड़े वर्गों की महिलाओं को अलग से प्रतिनिधित्व मिलना जरूरी है।

इस पूरे घटनाक्रम ने संसद के भीतर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है और महिला आरक्षण के साथ-साथ जनगणना और सामाजिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में इन विधेयकों पर चर्चा और भी तेज होने की संभावना है।

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