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यूपी में प्रधान ही चलाएंगे गांव की सरकार, योगी सरकार का बड़ा फैसला

यूपी में प्रधान ही चलाएंगे गांव की सरकार, योगी सरकार का बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 25 मई को समाप्त हो गया है, लेकिन इसके बावजूद गांवों की सत्ता फिलहाल मौजूदा ग्राम प्रधानों के हाथों में ही बनी रहेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंचायती राज विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत वर्तमान ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। माना जा रहा है कि इस संबंध में सरकार जल्द ही औपचारिक आदेश जारी करेगी।

प्रदेश में यह पहली बार होगा जब ग्राम पंचायतों में प्रशासक समिति के रूप में खुद ग्राम प्रधानों को जिम्मेदारी दी जाएगी। इससे पहले जब भी पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो पाए, तब गांवों के एडीओ पंचायत या सचिव को प्रशासक नियुक्त किया जाता था और ग्राम प्रधानों के वित्तीय तथा प्रशासनिक अधिकार समाप्त कर दिए जाते थे। लेकिन इस बार सरकार ने नई व्यवस्था लागू करते हुए प्रधानों को ही गांव की व्यवस्था संभालने का अधिकार देने का फैसला किया है।

दरअसल, उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो सके हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह ओबीसी आरक्षण को लेकर बनी स्थिति मानी जा रही है। सरकार द्वारा ओबीसी आयोग के गठन के बाद भी चुनावी प्रक्रिया पूरी होने में करीब छह महीने का समय लगने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में अब पंचायत चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद कराए जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

सरकार का मानना है कि यदि पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति समय पर नहीं की जाती, तो गांवों में विकास कार्य और प्रशासनिक व्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसी वजह से सरकार ने मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक बनाने का फैसला लिया है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं और सरकारी कार्यों की निरंतरता बनी रहे।

नई व्यवस्था के तहत ग्राम प्रधानों का संवैधानिक कार्यकाल भले ही समाप्त हो चुका हो, लेकिन वे अब प्रशासक की भूमिका में गांव की सरकार चलाते रहेंगे। इससे गांवों में चल रहे विकास कार्यों, पंचायत स्तर की योजनाओं और प्रशासनिक फैसलों पर किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा।

बताया जा रहा है कि हाल ही में ग्राम प्रधानों ने सचिवों को प्रशासक बनाए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ लखनऊ में विरोध प्रदर्शन भी किया था। वहीं अगले साल प्रस्तावित विधानसभा चुनावों को देखते हुए सरकार गांव स्तर पर कोई बड़ा विवाद खड़ा नहीं करना चाहती थी। ऐसे में सरकार ने राजनीतिक और प्रशासनिक संतुलन साधते हुए मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया है।

सरकार के इस निर्णय को ग्रामीण प्रशासन में स्थिरता बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे पंचायत स्तर पर चल रही योजनाओं और विकास कार्यों में रुकावट आने की संभावना कम हो जाएगी।

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