मुख्य सामग्री पर जाएं
ब्रेकिंग न्यूज़
गोरखपुर-वाराणसी समेत 4 शहरों में भारत टैक्सी की शुरुआत, योगी सरकार ने शुरू किया नया मॉडल योगी सरकार ने बिजली विभाग को दिए सख्त निर्देश, त्योहारों में निर्बाध आपूर्ति का बनाया प्लान राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: तीन और आरोपियों की जमानत खारिज, टिन्नू यादव की याचिका पर आज सुनवाई राज्यसभा चुनाव से पहले BJP की नई रणनीति, यूपी में बदलेंगे ज्यादातर चेहरे, जातीय समीकरण रहेगा कायम ‘पैसे मांगे तो जेल में सड़ना पड़ेगा’, शिक्षकों को नियुक्ति पत्र देते समय CM योगी की सख्त चेतावनी क्या दूसरे राज्यों में भी दिख रहा योगी मॉडल? बिहार के जमुई कांड से कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल योगी सरकार का जॉब कैलेंडर ऑन! 4 दिन में 5,297 युवाओं को मिली सरकारी नौकरी CM योगी देंगे 818 युवाओं को नियुक्ति पत्र, स्वास्थ्य से आयुष तक इन पदों पर मिलेगी नौकरी अमित शाह करेंगे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का उद्घाटन, 25 सितंबर से शुरू होगा बड़ा आयोजन ‘बंदूक की राजनीति अब नहीं चलेगी’, मेरठ में सीएम योगी का सपा-कांग्रेस पर बड़ा हमला

लखनऊ कोर्ट से 65 दिन बाद निकांत जैन को राहत, अभिषेक प्रकाश की बहाली की उम्मीद

लखनऊ कोर्ट से 65 दिन बाद निकांत जैन को राहत, अभिषेक प्रकाश की बहाली की उम्मीद

भले ही सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ “ज़ीरो टॉलरेंस” की नीति अपना रखी हो, लेकिन नौकरशाही की सरपरस्ती में भ्रष्टाचार के आरोपी दलाल निकान्त जैन को अंततः जमानत मिल ही गई। अब यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि निलंबित आईएएस अफसर अभिषेक प्रकाश की भी बहाली जल्द हो सकती है। दूसरी ओर, ईडी और विजिलेंस जैसी एजेंसियों की कार्रवाई अब तक किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंची है।

20 मार्च को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इन्वेस्ट यूपी के तत्कालीन सीईओ अभिषेक प्रकाश को सस्पेंड किया गया था।
उनके करीबी बताए जा रहे दलाल निकान्त जैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके गिरफ्तार भी किया गया, लेकिन तीन सदस्यीय एसआईटी टीम अब तक रिश्वत मांगने वाले किसी वरिष्ठ अधिकारी का नाम सार्वजनिक नहीं कर सकी है। एक करोड़ रुपये की रिश्वत की रकम भी गायब है—ना तो जमीन से मिली, ना आसमान से। पुलिस की 1600 पन्नों की चार्जशीट में भी कोई बड़ा या निर्णायक तथ्य सामने नहीं आया है।

एजेंसियों की जांच सवालों के घेरे में
ईडी और विजिलेंस अभी तक आईएएस अभिषेक प्रकाश की कोई अवैध संपत्ति ढूंढ पाने में असफल रही हैं। ईडी ने अपनी सारी ताकत दलाल निकान्त जैन पर केंद्रित कर रखी है, लेकिन उसकी बेनामी संपत्तियों का भी कोई खास सुराग हाथ नहीं लगा है। करीब 65 दिन जेल में बिताने के बाद निकान्त जैन को ज़मानत पर रिहा किया गया, जिससे जांच एजेंसियों की साख पर सवाल खड़े हो गए हैं।

निलंबन की अधिकतम सीमा पार होने की कगार पर
नियमों के अनुसार किसी आईएएस अधिकारी को 90 दिनों से अधिक निलंबित नहीं रखा जा सकता। यदि निलंबन बढ़ाना हो, तो मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति कारणों पर विचार करेगी और केंद्र सरकार के डीओपीटी विभाग को सिफारिश भेजी जाएगी। ऐसे में यह आशंका बल पकड़ रही है कि अभिषेक प्रकाश की बहाली जल्द हो सकती है।

जमानत का आधार: सबूतों की कमी
विशेष भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय के न्यायाधीश सत्येंद्र सिंह ने निकान्त जैन को दो लाख रुपये की जमानत और दो लाख के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। बचाव पक्ष का कहना था कि निकान्त जैन कोई लोकसेवक नहीं है, इसलिए उस पर पीसी एक्ट लागू नहीं होता। पुलिस के पास कोई ठोस सबूत नहीं है, ना ही रिश्वत की रकम बरामद हुई है। इससे पहले अदालत ने रिमांड की अर्जी भी खारिज कर दी थी, क्योंकि पुलिस ने इसे नियत 40 दिन के बजाय 45वें दिन दायर किया था।

Share
अगला लेख → "विदेश यात्रा का मकसद पार्टी नहीं, भारत की छवि को प्रस्तुत क…

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *