मुख्य सामग्री पर जाएं
ब्रेकिंग न्यूज़
तरुण तेजपाल को बड़ा झटका! यौन उत्पीड़न केस में हाईकोर्ट ने ठहराया दोषी भगवंत सरकार कैबिनेट ने ‘पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) विधेयक-2026’ सहित कई जनहित के कार्यों को दी मंजूरी ‘क्या हमारी कीमत कीड़े-मकौड़ों से भी कम है?’ झारखंड के आंदोलनकारी छात्रों का फूटा गुस्सा किसी का कान फटा, किसी का कंधा खिसका’—एअर इंडिया फ्लाइट के यात्रियों ने सुनाई दहला देने वाली आपबीती हवा में हड़कंप! टर्बुलेंस में फंसी एअर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट, कई यात्री घायल पटना में बनेगा PM मोदी का मंदिर, बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड की बैठक में बड़ा फैसला CM योगी का बड़ा लक्ष्य, इस बार 5 करोड़ घरों पर फहराएगा तिरंगा भगवा वेश में प्रदर्शन पड़ा भारी! राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ केस दर्ज उमर खालिद की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को हाई कोर्ट का नोटिस SCO समिट के लिए पीएम मोदी को न्योता भेजने की तैयारी में पाकिस्तान, क्या इस्लामाबाद जाएंगे प्रधानमंत्री?

लखनऊ कोर्ट से 65 दिन बाद निकांत जैन को राहत, अभिषेक प्रकाश की बहाली की उम्मीद

लखनऊ कोर्ट से 65 दिन बाद निकांत जैन को राहत, अभिषेक प्रकाश की बहाली की उम्मीद

भले ही सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ “ज़ीरो टॉलरेंस” की नीति अपना रखी हो, लेकिन नौकरशाही की सरपरस्ती में भ्रष्टाचार के आरोपी दलाल निकान्त जैन को अंततः जमानत मिल ही गई। अब यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि निलंबित आईएएस अफसर अभिषेक प्रकाश की भी बहाली जल्द हो सकती है। दूसरी ओर, ईडी और विजिलेंस जैसी एजेंसियों की कार्रवाई अब तक किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंची है।

20 मार्च को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इन्वेस्ट यूपी के तत्कालीन सीईओ अभिषेक प्रकाश को सस्पेंड किया गया था।
उनके करीबी बताए जा रहे दलाल निकान्त जैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके गिरफ्तार भी किया गया, लेकिन तीन सदस्यीय एसआईटी टीम अब तक रिश्वत मांगने वाले किसी वरिष्ठ अधिकारी का नाम सार्वजनिक नहीं कर सकी है। एक करोड़ रुपये की रिश्वत की रकम भी गायब है—ना तो जमीन से मिली, ना आसमान से। पुलिस की 1600 पन्नों की चार्जशीट में भी कोई बड़ा या निर्णायक तथ्य सामने नहीं आया है।

एजेंसियों की जांच सवालों के घेरे में
ईडी और विजिलेंस अभी तक आईएएस अभिषेक प्रकाश की कोई अवैध संपत्ति ढूंढ पाने में असफल रही हैं। ईडी ने अपनी सारी ताकत दलाल निकान्त जैन पर केंद्रित कर रखी है, लेकिन उसकी बेनामी संपत्तियों का भी कोई खास सुराग हाथ नहीं लगा है। करीब 65 दिन जेल में बिताने के बाद निकान्त जैन को ज़मानत पर रिहा किया गया, जिससे जांच एजेंसियों की साख पर सवाल खड़े हो गए हैं।

निलंबन की अधिकतम सीमा पार होने की कगार पर
नियमों के अनुसार किसी आईएएस अधिकारी को 90 दिनों से अधिक निलंबित नहीं रखा जा सकता। यदि निलंबन बढ़ाना हो, तो मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति कारणों पर विचार करेगी और केंद्र सरकार के डीओपीटी विभाग को सिफारिश भेजी जाएगी। ऐसे में यह आशंका बल पकड़ रही है कि अभिषेक प्रकाश की बहाली जल्द हो सकती है।

जमानत का आधार: सबूतों की कमी
विशेष भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय के न्यायाधीश सत्येंद्र सिंह ने निकान्त जैन को दो लाख रुपये की जमानत और दो लाख के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। बचाव पक्ष का कहना था कि निकान्त जैन कोई लोकसेवक नहीं है, इसलिए उस पर पीसी एक्ट लागू नहीं होता। पुलिस के पास कोई ठोस सबूत नहीं है, ना ही रिश्वत की रकम बरामद हुई है। इससे पहले अदालत ने रिमांड की अर्जी भी खारिज कर दी थी, क्योंकि पुलिस ने इसे नियत 40 दिन के बजाय 45वें दिन दायर किया था।

Share This
अगला लेख → "विदेश यात्रा का मकसद पार्टी नहीं, भारत की छवि को प्रस्तुत क…

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *

बाज़ार
सेंसेक्स 78,499 -456 (-0.58%)
निफ्टी 24,571 -65 (-0.26%)
मौसम
24°C
Patchy rain nearby
💧 93% 💨 4 km/h
Dehradun