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पप्पू यादव के बयान पर बवाल, प्रियंका चतुर्वेदी बोलीं- बेहद शर्मनाक

पप्पू यादव के बयान पर बवाल, प्रियंका चतुर्वेदी बोलीं- बेहद शर्मनाक

पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के एक विवादित बयान ने देशभर की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। राजनीति में महिलाओं की भूमिका को लेकर दिए गए उनके कथित बयान पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे बेहद आपत्तिजनक करार दिया है। इस बयान के बाद न केवल राजनीतिक विरोध तेज हुआ है, बल्कि Bihar State Women Commission ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए सांसद को नोटिस जारी किया है।

बताया जा रहा है कि पप्पू यादव ने हाल ही में एक बयान में दावा किया कि आज के समय में महिलाओं के लिए बिना समझौते के राजनीति में आगे बढ़ना मुश्किल है। उनके इस बयान को लेकर व्यापक स्तर पर आलोचना हो रही है और इसे महिलाओं की गरिमा के खिलाफ बताया जा रहा है। कई नेताओं का कहना है कि इस तरह की टिप्पणियां न केवल महिलाओं का अपमान हैं, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देती हैं।

शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “शर्मनाक, घृणित और बेहद आपत्तिजनक” बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी सोच ही महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देती है और सार्वजनिक जीवन में उनकी भागीदारी को प्रभावित करती है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से भी इस मुद्दे को उठाते हुए कड़ी निंदा की।

वहीं, महाराष्ट्र सरकार में मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने भी इस बयान पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां देश की संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के खिलाफ हैं और महिलाओं की छवि को ठेस पहुंचाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे संबंधित व्यक्ति किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हो।

इस विवाद के बीच बिहार राज्य महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पप्पू यादव को नोटिस जारी किया है। आयोग की अध्यक्ष ने नोटिस में कहा है कि इस तरह के बयान महिलाओं के आत्मसम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाते हैं। सांसद से तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है और यह भी पूछा गया है कि उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई क्यों न की जाए।

नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के प्रति इस तरह की भाषा और सोच स्वीकार्य नहीं है। आयोग ने यह भी संकेत दिया है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो मामले को आगे बढ़ाया जा सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। एक ओर जहां विपक्ष और अन्य दलों के नेता इस बयान की निंदा कर रहे हैं, वहीं महिला सम्मान और राजनीति में उनकी भागीदारी को लेकर भी एक बार फिर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है।

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