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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को संचालन की मंजूरी, 17 जुलाई को हो सकता है शुभारंभ

नई दिल्ली, 10 जुलाई। भारतीय रेलवे ने देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित यात्री ट्रेन के संचालन को औपचारिक मंजूरी दे दी है। हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड पर चलने वाली इस अत्याधुनिक ट्रेन का शुभारंभ 17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए जाने की संभावना है। रेलवे की यह महत्वाकांक्षी परियोजना स्वच्छ ऊर्जा […]

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को संचालन की मंजूरी, 17 जुलाई को हो सकता है शुभारंभ

नई दिल्ली, 10 जुलाई। भारतीय रेलवे ने देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित यात्री ट्रेन के संचालन को औपचारिक मंजूरी दे दी है। हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड पर चलने वाली इस अत्याधुनिक ट्रेन का शुभारंभ 17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए जाने की संभावना है। रेलवे की यह महत्वाकांक्षी परियोजना स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

उत्तरी रेलवे के अंतर्गत जींद-सोनीपत रेलखंड को इस परियोजना के लिए पायलट कॉरिडोर के रूप में विकसित किया गया है। दस डिब्बों वाली इस ट्रेन को पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से डिजाइन और विकसित किया गया है। 1200 किलोवाट क्षमता वाली हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रणाली से संचालित यह ट्रेन अधिकतम 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेगी। ब्रॉड गेज प्लेटफॉर्म पर तैयार की गई यह ट्रेन 10 कोचों के साथ वर्तमान में विश्व की सबसे लंबी हाइड्रोजन-संचालित यात्री ट्रेन मानी जा रही है।

जींद-सोनीपत रेलखंड पर दौड़ेगी स्वदेशी तकनीक से विकसित ट्रेन, रेलवे के हरित परिवहन अभियान को मिलेगी नई गति

ट्रेन के संचालन के लिए जींद में अत्याधुनिक हाइड्रोजन भंडारण एवं रीफ्यूलिंग स्टेशन भी स्थापित किया गया है। हाइड्रोजन गैस के सुरक्षित भंडारण और आपूर्ति के लिए सभी आवश्यक लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। सुरक्षा के मद्देनजर स्टेशन पर गैस रिसाव का पता लगाने वाले सेंसर, फ्लेम डिटेक्टर, उन्नत निगरानी प्रणाली तथा बैकअप कंप्रेसर लगाए गए हैं। इसके अलावा नियमित तकनीकी निरीक्षण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है, जिससे ट्रेन का संचालन सुरक्षित और विश्वसनीय बना रहे।

हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली उत्पन्न होती है। इस प्रक्रिया में किसी प्रकार का धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता और केवल जलवाष्प निकलती है। यही कारण है कि यह तकनीक पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में अधिक पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ मानी जाती है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना भारतीय रेलवे के “ग्रीन ट्रांसपोर्ट” विजन का अहम हिस्सा है। यदि इसका परीक्षण और संचालन सफल रहता है, तो भविष्य में देश के अन्य गैर-विद्युतीकृत रेल मार्गों पर भी हाइड्रोजन आधारित ट्रेनों का संचालन किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जिन्होंने रेल परिवहन में हाइड्रोजन आधारित स्वच्छ ऊर्जा तकनीक को अपनाया है। इससे न केवल कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, बल्कि रेलवे के हरित परिवर्तन और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी नई दिशा मिलेगी।

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