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पटना में ₹3,000 करोड़ का मेगा मेट्रो प्रोजेक्ट, बेली रोड के नीचे बनेगी 10.54 किमी अंडरग्राउंड टनल

पटना: बिहार की राजधानी पटना में शहरी परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राजधानी की सबसे व्यस्त सड़कों में शामिल बेली रोड (नेहरू पथ) के नीचे लगभग 10.54 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड मेट्रो सुरंग का निर्माण किया जाएगा। करीब 3,000 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना पटना मेट्रो कॉरिडोर-1 का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। प्रस्तावित योजना के अनुसार नवंबर से टनल बोरिंग मशीन (TBM) के जरिए सुरंग की खुदाई शुरू होने की संभावना है।

यह अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन मीठापुर से शुरू होकर पटना जंक्शन, विद्युत भवन, विकास भवन, पटना जू, राजा बाजार, रुकनपुरा होते हुए पाटलिपुत्र जंक्शन तक पहुंचेगी। परियोजना पूरी होने के बाद राजधानी के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच आवागमन पहले की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगा। साथ ही सचिवालय, हाईकोर्ट, विधानसभा, राजभवन, एयरपोर्ट, प्रमुख अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंच भी आसान होगी।

सुरंग निर्माण के लिए अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) तकनीक का उपयोग किया जाएगा। पटना जू के पास लॉन्चिंग शाफ्ट तैयार किया जा रहा है, जहां से चार टीबीएम मशीनें जमीन के भीतर उतारी जाएंगी। शुरुआती चरण में दो मशीनें रुकनपुरा की दिशा में और दो मशीनें विकास भवन एवं विद्युत भवन की ओर सुरंग निर्माण का कार्य करेंगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक घनी आबादी और संवेदनशील क्षेत्रों में भी सुरक्षित तरीके से निर्माण कार्य करने में सक्षम है।

परियोजना के तहत बेली रोड पर पांच भूमिगत मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे, जिसके लिए कई स्थानों पर लगभग 16 मीटर गहरी खुदाई की जाएगी। निर्माण कार्य के दौरान कुछ हिस्सों में यातायात प्रभावित हो सकता है और प्रशासन को ट्रैफिक प्रबंधन की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। इसके लिए वैकल्पिक मार्ग, अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिस बल की तैनाती और भारी वाहनों के प्रवेश पर नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं की योजना बनाई जा रही है।

पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने मार्च 2027 तक दो नए एलिवेटेड रूटों पर मेट्रो संचालन शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यात्रियों को समय पर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पुणे मेट्रो से तीन ट्रेन सेट तीन वर्ष की लीज पर लिए जाएंगे। प्रत्येक ट्रेन में तीन कोच होंगे और इनकी व्यवस्था पर लगभग 63.45 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उम्मीद है कि ट्रेनें इस वर्ष के अंत तक पटना पहुंच जाएंगी और वर्ष 2027 में ट्रायल रन शुरू हो सकेगा।

यह परियोजना केवल एक मेट्रो नेटवर्क तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार में तेजी से विकसित हो रहे आधुनिक बुनियादी ढांचे का भी प्रतीक मानी जा रही है। एक्सप्रेस-वे, नए एयरपोर्ट, रेलवे आधुनिकीकरण और औद्योगिक परियोजनाओं के साथ पटना मेट्रो राजधानी की बदलती तस्वीर को नई पहचान देने का काम करेगी। परियोजना पूरी होने के बाद शहर के लाखों लोगों को ट्रैफिक जाम से राहत मिलने के साथ-साथ बेहतर और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन सुविधा भी उपलब्ध होगी।

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