अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्रों से कथित रूप से नकदी गायब होने के मामले में चल रही एसआईटी जांच के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आ रही हैं। हालांकि अब तक किसी भी स्तर पर गायब हुई रकम का आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है, लेकिन जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि मामला लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है। इसी वजह से इस प्रकरण को मंदिर प्रशासन और जांच एजेंसियां बेहद गंभीरता से ले रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, जांच में यह संकेत मिले हैं कि दानराशि में कथित अनियमितताओं का सिलसिला रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले ही शुरू हो गया था। हालांकि 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा के बाद श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे में तेजी से वृद्धि होने पर कथित गड़बड़ियों का दायरा भी बढ़ता चला गया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह पूरा तंत्र कब से सक्रिय था और इसमें कितने लोग शामिल थे।
एसआईटी की जांच में अनुकल्प मिश्रा का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, मंदिर से जुड़े कार्यों में नियुक्ति मिलने के बाद उन्हें दानराशि की गणना से संबंधित जिम्मेदारियां भी सौंपी गई थीं। जांच एजेंसियों को संदेह है कि समय के साथ उन्होंने अपने कुछ परिचितों और रिश्तेदारों का एक नेटवर्क तैयार किया, जिसके जरिए कथित रूप से दानराशि में हेराफेरी की गई। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है।
जांच में यह भी सामने आया है कि गणना प्रक्रिया से जुड़े कुछ कर्मचारियों को कथित तौर पर प्रभाव में लेकर एक संगठित व्यवस्था तैयार की गई थी। सूत्रों के अनुसार, कुछ लोगों को गणना कार्य में शामिल कर दानराशि के प्रबंधन पर पकड़ बनाने का प्रयास किया गया। एसआईटी अब यह जानने का प्रयास कर रही है कि इस पूरी प्रक्रिया में किस-किस स्तर पर निगरानी की कमी रही और किसकी क्या भूमिका थी।
सूत्रों के मुताबिक, दानपात्रों से निकाली गई नकदी को पहले मंदिर परिसर से जुड़े एक स्थान पर छिपाया जाता था और बाद में उसे बाहर ले जाने की कोशिश की जाती थी। जांच एजेंसियां इन दावों की पुष्टि के लिए सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का मिलान कर रही हैं। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि सुरक्षा व्यवस्था में ऐसी कौन-सी खामियां थीं जिनके कारण कथित रूप से यह गतिविधियां लंबे समय तक चलती रहीं।
एसआईटी उन लोगों से भी पूछताछ कर रही है जो दानराशि की गणना, निगरानी और बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया से जुड़े थे। जांच के दायरे में कई कर्मचारी, प्रबंधकीय जिम्मेदारी संभालने वाले लोग और अन्य संबंधित व्यक्ति शामिल हैं। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कर्मचारियों की नियुक्ति, ड्यूटी निर्धारण और निगरानी की प्रक्रिया किस प्रकार संचालित होती थी।
पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि आखिर दानपात्रों से कितनी राशि गायब हुई। इसके लिए एसआईटी बैंक रिकॉर्ड, नकदी जमा विवरण, सीसीटीवी फुटेज और कर्मचारियों के बयानों का मिलान कर रही है। जांच अधिकारियों का मानना है कि सभी तथ्यों की पुष्टि होने के बाद ही वास्तविक वित्तीय नुकसान का सही आकलन किया जा सकेगा।
देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में शामिल राम मंदिर में दानराशि से जुड़ी कथित अनियमितताओं ने श्रद्धालुओं के बीच चिंता बढ़ा दी है। वहीं मंदिर की वित्तीय व्यवस्था और निगरानी तंत्र को लेकर भी कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। अब सभी की निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे इस पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आने की उम्मीद की जा रही है।

