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राम मंदिर भूमि खरीद पर बड़ा विवाद, संजय सिंह ने चंपत राय पर लगाए करोड़ों के घोटाले के आरोप

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के इस्तेमाल को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चंदे का इस्तेमाल जमीन खरीद में कथित अनियमितताओं के साथ किया गया।

संजय सिंह ने आरोप लगाया कि अप्रैल 2024 में अयोध्या में करीब 645 वर्ग मीटर की एक जमीन खरीदी गई, जिसकी वास्तविक कीमत लगभग 3 करोड़ रुपये बताई जा रही थी, लेकिन इसे करीब 24 करोड़ रुपये में खरीदा गया। उनका कहना है कि इस खरीद में मंदिर को प्राप्त दान राशि का उपयोग किया गया और जमीन की कीमत वास्तविक मूल्य से कई गुना अधिक चुकाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे सौदे में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

AAP सांसद ने यह भी दावा किया कि संबंधित भूमि नजूल यानी सरकारी जमीन थी। उनके अनुसार, जुलाई 2024 में प्रशासनिक स्तर पर इस भूमि की स्थिति को लेकर जानकारी सामने आई थी, जिससे इस सौदे पर और अधिक सवाल खड़े हो गए। संजय सिंह का कहना है कि सरकारी भूमि की खरीद-बिक्री नियमों के तहत संभव नहीं है, ऐसे में इस मामले की कानूनी जांच जरूरी है।

राम मंदिर से जुड़े इस विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। इससे पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के उपयोग को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने दान राशि में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग करते हुए मामले को सार्वजनिक रूप से उठाया था।

वहीं, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ भाजपा नेता विनय कटियार ने भी कथित अनियमितताओं को लेकर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि जांच होने पर पूरे मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो जाएगी।

हालांकि, इन आरोपों पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि संबंधित एजेंसियां और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और आरोपों की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।

राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में दान राशि और भूमि खरीद से जुड़े किसी भी आरोप की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच को लेकर मांग लगातार तेज होती जा रही है। इस विवाद ने न केवल राजनीतिक बहस को हवा दी है, बल्कि मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

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