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राम मंदिर चढ़ावा मामले में SIT की बड़ी रिपोर्ट, चंपत राय समेत 14 लोगों की भूमिका पर उठे सवाल

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और गबन मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। करीब 20 पन्नों की इस रिपोर्ट में मंदिर की दान व्यवस्था, निगरानी तंत्र और प्रबंधन से जुड़े कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंपी गई है, जिसमें एफआईआर दर्ज करने, ट्रस्ट की संरचना की समीक्षा करने और मंदिर प्रशासन में व्यापक सुधार लागू करने जैसी महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की जांच में नकदी के अलावा श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए कुछ आभूषणों के गायब होने की आशंका भी सामने आई है। रिपोर्ट में चढ़ावे की गणना प्रक्रिया, कर्मचारियों की नियुक्ति, निगरानी व्यवस्था और बैंकिंग प्रक्रियाओं में संभावित खामियों का उल्लेख किया गया है। जांच दल ने ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों, बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को भी जांच के दायरे में रखा है।

गौरतलब है कि मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का मामला सार्वजनिक होने के बाद 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर लखनऊ मंडलायुक्त डॉ. विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। जांच टीम ने 15 जून से मामले की पड़ताल शुरू की और अब अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है।

रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दौरान करीब 150 लोगों से पूछताछ की गई। इनमें मंदिर ट्रस्ट, बैंकिंग व्यवस्था और चढ़ावे की गणना से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। सूत्रों का दावा है कि एसआईटी ने ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा, व्यवस्थापक गोपाल राव तथा व्यवस्था से जुड़े रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत कुल 14 लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय जांच पूरी होने और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।

एसआईटी को जांच के दौरान कुछ ऐसे बयान भी मिले हैं जो उपलब्ध दस्तावेजों और अभिलेखों से मेल नहीं खाते। इसी वजह से जांच एजेंसी मामले का दायरा और बढ़ाने पर विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों के चढ़ावे और दान राशि का विशेष ऑडिट कराने की भी सिफारिश की गई है ताकि वित्तीय लेनदेन की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके।

जांच में अब तक पांच आरोपियों की निशानदेही पर लगभग दो करोड़ रुपये बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। साथ ही दानपात्रों की चाबियों के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठे हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ कर्मचारियों को कथित अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं की गई।

एसआईटी ने अपनी सिफारिशों में मंदिर प्रशासन को अधिक पेशेवर बनाने, दान राशि की गणना का नियमित ऑडिट कराने, प्रतिदिन प्राप्त चढ़ावे का डिजिटल रिकॉर्ड रखने और सीसीटीवी फुटेज के स्टोरेज की अवधि 45 दिन से बढ़ाकर 180 दिन करने का सुझाव दिया है। इसके अलावा जांच पूरी होने तक आरोपित व्यक्तियों की गतिविधियों पर निगरानी रखने और उन्हें बिना अनुमति अयोध्या छोड़ने से रोकने की भी सिफारिश की गई है।

सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया, चढ़ावे की गणना और कथित कमीशनखोरी से जुड़े पहलुओं पर भी सवाल उठाए गए हैं। साथ ही मंदिर परिसर में कर्मचारियों की आवाजाही और सुरक्षा जांच की व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई हैं।

एसआईटी अध्यक्ष डॉ. विजय विश्वास पंत ने पुष्टि की है कि प्रारंभिक गोपनीय जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में अब तक की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और सूचनाओं को शामिल किया गया है। मामले की जांच अभी जारी है और आगे की कार्रवाई सरकार तथा संबंधित एजेंसियों के निर्णय के आधार पर तय की जाएगी।

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