कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में दल-बदल और राज्यसभा उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग ने राज्य की तीन रिक्त राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव कराने की घोषणा कर दी है। ये सीटें तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन सांसदों के इस्तीफे के बाद खाली हुई हैं, जिन्होंने पार्टी छोड़ने के साथ-साथ अपनी राज्यसभा सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया और बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया।
सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक ने पहले टीएमसी और फिर राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया। पार्टी छोड़ने के तुरंत बाद तीनों नेता बीजेपी में शामिल हो गए। अब भाजपा ने इन्हीं तीनों नेताओं को राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि ये नेता दोबारा राज्यसभा पहुंच सकते हैं, लेकिन इस बार भाजपा के प्रतिनिधि के रूप में।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण पहलू दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार यदि कोई राज्यसभा सांसद बिना इस्तीफा दिए किसी दूसरी पार्टी में शामिल होता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है। इसी कानूनी स्थिति से बचने के लिए तीनों नेताओं ने पहले राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दिया और उसके बाद भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इस प्रक्रिया ने उन्हें दोबारा चुनाव लड़ने का कानूनी रास्ता उपलब्ध कराया।
राज्यसभा उपचुनाव के परिणाम पर पश्चिम बंगाल विधानसभा का संख्या बल भी अहम भूमिका निभाएगा। राज्यसभा चुनाव में प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए निर्धारित प्राथमिक मतों की आवश्यकता होती है। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और विधानसभा में उपलब्ध समर्थन के आधार पर भाजपा अपने उम्मीदवारों की जीत को लेकर आश्वस्त दिखाई दे रही है। यदि पार्टी को अपेक्षित समर्थन मिलता है, तो तीनों उम्मीदवारों के उच्च सदन में दोबारा पहुंचने की संभावना मजबूत मानी जा रही है।
दूसरी ओर, टीएमसी के लिए यह घटनाक्रम राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर चुनौती बनकर उभरा है। पार्टी पहले ही अंदरूनी मतभेदों और गुटबाजी की चर्चाओं का सामना कर रही है। ऐसे में तीन वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफे और भाजपा में शामिल होने से राज्यसभा में पार्टी की संख्या प्रभावित हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी उपचुनाव केवल तीन सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक तस्वीर का भी संकेत हो सकता है।
