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जनता की शिकायतें सुनने वाले उपमुख्यमंत्री खुद बने शिकायतकर्ता, आवास में भरा सीवर का पानी

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मानसून से पहले ही जलभराव की समस्या ने नगर निगम की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का सरकारी आवास भी इससे अछूता नहीं रहा। पिछले पांच दिनों के भीतर दूसरी बार उनके सरकारी आवास परिसर में नाले और सीवर का गंदा पानी भर गया, जिससे नाराजगी जताते हुए उनके कार्यालय ने नगर निगम को पत्र लिखकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

जानकारी के अनुसार केशव प्रसाद मौर्य का सरकारी आवास सात कालिदास मार्ग पर स्थित है। पिछले एक सप्ताह के दौरान कई बार आवास परिसर के लॉन और आसपास के हिस्सों में नाले का गंदा पानी जमा हो गया। 12 जून को भी इसी तरह की स्थिति उत्पन्न हुई थी, जिसके बाद नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और पानी की निकासी कराई। उस समय अधिकारियों ने जल्द ही स्थायी समाधान का आश्वासन भी दिया था।

हालांकि, समस्या का समाधान नहीं हो सका और मंगलवार को एक बार फिर आवास परिसर में सीवर और नाले का गंदा पानी भर गया। लगातार दोबारा जलभराव होने से उपमुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। इसके बाद उनके निजी सचिव ने नगर आयुक्त को पत्र भेजकर पूरे मामले से अवगत कराया और संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए।

पत्र में कहा गया कि पहले भी नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी को समस्या की जानकारी दी गई थी। शिकायत मिलने के बाद निरीक्षण के लिए जेई प्रतिमा यादव और किशोरी लाल मौके पर पहुंचे थे। दोनों अधिकारियों ने अगले दिन स्थायी समाधान कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। परिणामस्वरूप दोबारा गंदा पानी आवास परिसर में भर गया।

उपमुख्यमंत्री कार्यालय ने नगर निगम से न केवल तत्काल समस्या का समाधान करने की मांग की है, बल्कि इस मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी बात कही है। बताया गया है कि संबंधित क्षेत्र के अधिशासी अभियंता अतुल मिश्रा अवकाश पर हैं, जबकि सहायक अभियंता अवधेश सिंह ड्यूटी पर मौजूद थे। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी समय पर मौके का निरीक्षण करते तो समस्या का समाधान संभव था।

जानकारों के मुताबिक, यह समस्या नई नहीं है। हर वर्ष बारिश के मौसम में उपमुख्यमंत्री आवास के आसपास जलभराव की स्थिति बनती है, लेकिन अब तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब प्रदेश के उपमुख्यमंत्री का आवास ही जलभराव की समस्या से जूझ रहा है, तो आम नागरिकों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रभारी नगर आयुक्त अभिनव रंजन श्रीवास्तव ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद नगर निगम की टीम मौके पर भेजी गई थी और पानी की निकासी भी कराई गई। उन्होंने बताया कि अब समस्या के स्थायी समाधान के लिए विस्तृत योजना तैयार की जा रही है और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दे दिए गए हैं।

लखनऊ में बारिश से पहले सामने आई यह घटना नगर निगम की तैयारियों और नाला सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। आने वाले दिनों में मानसून के सक्रिय होने के साथ जलभराव की चुनौती और बढ़ सकती है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती शहर के प्रमुख इलाकों समेत आवासीय क्षेत्रों में जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने की होगी।

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