उत्तर प्रदेश को सड़क संपर्क के क्षेत्र में बड़ी सौगात मिलने जा रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संयुक्त रूप से ₹4,850 करोड़ से अधिक की तीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। इनमें सबसे महत्वपूर्ण कानपुर-लखनऊ 6-लेन एक्सप्रेसवे है, जिसके शुरू होने से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय लगभग तीन घंटे से घटकर केवल 35 से 40 मिनट रह जाएगा।
करीब ₹3,600 करोड़ की लागत से तैयार इस अत्याधुनिक एक्सप्रेसवे पर वाहन 120 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से चल सकेंगे। यह मार्ग केवल लखनऊ और कानपुर के बीच आवागमन को ही आसान नहीं बनाएगा, बल्कि सीतापुर, हरदोई, अयोध्या और सुल्तानपुर जैसे क्षेत्रों के यात्रियों को भी तेज और बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक्सप्रेसवे को आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं से लैस किया है। पूरे मार्ग पर 4 बड़े पुल, 25 छोटे पुल, 4 फ्लाईओवर, 11 पैदल अंडरपास और हल्के वाहनों के लिए 13 अंडरपास बनाए गए हैं। इसके अलावा सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 63 सीसीटीवी कैमरे और 16 वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम लगाए गए हैं। किसी भी दुर्घटना की सूचना मिलने पर कंट्रोल सेंटर से रेस्क्यू टीम को तुरंत अलर्ट किया जाएगा और 15 मिनट के भीतर सहायता पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
एक्सप्रेसवे पर यात्रा के लिए टोल शुल्क भी निर्धारित किया गया है। कार, जीप और वैन के लिए एक तरफ का टोल ₹275 तथा 24 घंटे के भीतर वापसी पर ₹415 होगा। हल्के व्यावसायिक वाहनों के लिए एक तरफ ₹445 और उसी दिन वापसी पर ₹670 तय किया गया है। वहीं बस और ट्रक के लिए एक तरफ का टोल ₹935 तथा 24 घंटे के भीतर वापसी पर ₹1,405 रखा गया है।
इस कार्यक्रम के दौरान हरदोई-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग (पैकेज-4) के चार लेन निर्माण का लोकार्पण भी किया जाएगा। साथ ही इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर चार लेन फ्लाईओवर का शिलान्यास होगा। इससे विकास नगर, खुर्मी नगर, जानकीपुरम और आसपास के क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी तथा लखनऊ-हरदोई-शाहजहांपुर मार्ग पर यातायात और अधिक सुगम बनेगा।
सरकार का मानना है कि इन सड़क परियोजनाओं से औद्योगिक क्षेत्रों, लॉजिस्टिक्स हब और उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर को बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा। इससे व्यापार, निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, कृषि एवं स्थानीय उत्पादों की बड़े बाजारों तक पहुंच आसान होगी और पुराने राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात का दबाव कम होने के साथ समय और ईंधन दोनों की बचत होगी।
