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‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पर RSS का पहला बयान, लोकतंत्र की ताकत पर जताया भरोसा

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर उठी चर्चाओं के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र इतना मजबूत है कि वह हर तरह की आवाज, विचार और भावनाओं को समाहित करने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं, विशेष रूप से ‘जेन-Z’ पीढ़ी को भारत और उसके लोकतांत्रिक ढांचे पर पूरा भरोसा है।

नागपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सुनील आंबेकर ने कहा कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है, जहां स्वतंत्र मीडिया, पारदर्शी चुनाव प्रणाली और मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग विचारों और नई चर्चाओं का सामने आना कोई असामान्य बात नहीं है। ऐसे मुद्दों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा मानकर देखा जाना चाहिए।

आंबेकर ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था किसी भी विचार या भावना को सुनने और उसे स्थान देने में सक्षम है। उनके अनुसार देश की जनता की शक्ति और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने विश्वास जताया कि लोकतंत्र के भीतर हर मुद्दे का समाधान निकालने की क्षमता मौजूद है और लोगों को इस व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।

आरएसएस नेता ने विशेष रूप से देश के युवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारत का जेन-Z वर्ग बेहद आशावादी है और उसे देश के भविष्य पर अटूट विश्वास है। उन्होंने कहा कि आज का युवा संवैधानिक दायरे में रहकर अपनी बात रखना और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से समाधान तलाशना पसंद करता है। लोकतंत्र में विभिन्न मुद्दे उठना स्वाभाविक है और उनके समाधान के लिए भी लोकतांत्रिक तरीके मौजूद हैं।

इस दौरान पाकिस्तान के साथ संवाद को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर आंबेकर ने आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के हालिया बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ हमेशा से मानता रहा है कि लोगों के बीच संवाद और संपर्क समस्याओं के समाधान का रास्ता खोल सकते हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारों के बीच आधिकारिक बातचीत, कूटनीतिक संबंध और नीतिगत फैसले पूरी तरह सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

उन्होंने कहा कि जब आधिकारिक स्तर पर संवाद सीमित हो, तब भी दोनों देशों के लोगों के बीच सांस्कृतिक, सामाजिक और व्यावसायिक संपर्क बने रहना सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। इससे आपसी समझ बढ़ती है और भविष्य में संबंधों को बेहतर बनाने की संभावनाएं मजबूत होती हैं।

सुनील आंबेकर ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ऐतिहासिक रूप से भारत के विभाजन का विरोध करता रहा है। उनका कहना था कि यदि उस दौर में संघ अधिक मजबूत स्थिति में होता, तो देश का विभाजन टाला जा सकता था। उन्होंने दोहराया कि संघ राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है।

आरएसएस की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर चर्चा तेज है। संघ ने अपने बयान में किसी विशेष संगठन या समूह पर सीधी टिप्पणी करने के बजाय भारतीय लोकतंत्र की मजबूती, युवाओं के विश्वास और संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया है।

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