उत्तर प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा विभाग के हालिया निर्णय ने प्रदेशभर के 2323 विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना का विकल्प चुनने से वंचित कर दिया है। इस फैसले के खिलाफ अब शिक्षक आदर्श माध्यमिक शिक्षक संघ के बैनर तले विरोध दर्ज करा रहे हैं।
संघ की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. आशालता सिंह ने विभाग के इस निर्णय को अन्यायपूर्ण, भ्रामक और कानूनी आदेशों की अवहेलना करार दिया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय उन शिक्षकों के साथ बड़ा अन्याय है, जो वर्षों से पुरानी पेंशन योजना की मांग करते आ रहे हैं और जिनकी नियुक्ति स्पष्ट रूप से मौलिक रिक्तियों के आधार पर हुई थी।
डॉ. सिंह ने जानकारी दी कि वर्ष 1999 से 2002 के बीच चयनित इन शिक्षकों का आमेलन न्यायालय के आदेशों के अनुसार बाद में किया गया। लेकिन वित्त विभाग द्वारा 28 जून 2024 को जारी शासनादेश के बावजूद, इन शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल सका। विभागीय अधिकारियों ने ’21-जी संशोधन’ का हवाला देकर उनका विकल्प पत्र स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
डॉ. सिंह का कहना है कि यदि संशोधन लागू किया गया है, तो उससे संबंधित स्पष्ट दिशा-निर्देश भी जारी होने चाहिए थे। ऐसा न करने से शिक्षकों को उनका वैधानिक अधिकार नहीं मिल पाया।
संघ के महासचिव सुरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने भी विभाग पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर तथ्यों को छुपा रहा है और न्यायालय के आदेशों को अधूरा ही लागू कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि समय पर न्यायालय के आदेशों का पालन होता, तो आज ये शिक्षक भी पुरानी पेंशन योजना के अंतर्गत लाभान्वित हो चुके होते।
प्रांत संयोजक रेखा सिंह ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि अधिकारियों को अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधी बातचीत की मांग की, जिससे शिक्षकों की समस्या का समाधान हो सके और उन्हें न्याय मिल सके।
संघ ने यह स्पष्ट किया कि ये सभी शिक्षक वित्त विभाग के शासनादेश संख्या 14/2024 दिनांक 28 जून 2024 की सभी शर्तों को पूरा करते हैं:
- इनकी नियुक्ति के लिए विज्ञापन 28 मार्च 2005 से पूर्व प्रकाशित हुआ था।
- इनका आमेलन वर्ष 2006-07 में, यानी 1 अप्रैल 2005 के बाद हुआ।
- चयन मौलिक रिक्तियों के विरुद्ध हुआ था, जिसके दस्तावेज विभाग के पास उपलब्ध हैं।
- ये शिक्षक केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमावली 1972 के नियम-17 के तहत पुरानी पेंशन का विकल्प चुनने के पात्र हैं।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले को शासन स्तर पर गंभीरता से नहीं लिया गया, तो वे आगे भी आंदोलन जारी रखने को विवश होंगे।

