भारत द्वारा 6-7 मई की रात को पहलगाम आतंकी हमले का जवाब देते हुए पाकिस्तान के 9 आतंकी अड्डों पर जबरदस्त मिसाइल हमला किया गया। इसके प्रतिउत्तर में पाकिस्तान ने भारत के कई सैन्य ठिकानों और शहरों पर मिसाइल, ड्रोन और फाइटर जेट से हमला करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने समय रहते पाकिस्तान के सभी हथियारों को हवा में ही नष्ट कर दिया। इसके बाद भारत ने फिर से पलटवार करते हुए पाकिस्तान के 11 सैन्य अड्डों को निशाना बनाया, जिससे पड़ोसी देश को 1 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ। इस जबरदस्त झटके के बाद पाकिस्तान की पहले से चरमराई अर्थव्यवस्था पर और बोझ बढ़ गया है। महंगाई बेलगाम हो गई है और आम जनता का जीना दुश्वार हो गया है। 10 मई के बाद से रोजमर्रा की चीज़ों के दामों में भारी इज़ाफा देखा गया है।
रोजमर्रा की चीजें बनीं आम आदमी की पहुंच से बाहर
वर्तमान में पाकिस्तान में महंगाई इस कदर बढ़ चुकी है कि दूध 150 रुपये लीटर, आटा 120 रुपये किलो, सरसों का तेल 500 रुपये लीटर और घी 2800 रुपये किलो तक पहुंच गया है। आटा, चीनी, दाल और चावल जैसी जरूरी चीजें बाजारों से गायब हो गई हैं। कई शहरों में जनता सड़कों पर उतरकर महंगाई के खिलाफ विरोध कर रही है।
भूखी जनता और जश्न मनाता सेनाध्यक्ष
एक ओर पाकिस्तान की जनता महंगाई, भूख और बेरोज़गारी से बेहाल है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर भारत से पराजय के बाद भी “फील्ड मार्शल” की उपाधि पाकर जश्न मना रहे हैं। जनता की स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि उन्हें दो वक्त का खाना जुटाना भी मुश्किल हो गया है।
खाद्य वस्तुओं के बढ़ते दामों ने दुकानदारों और ग्राहकों के बीच टकराव को जन्म दे दिया है। कई स्थानों से मारपीट और विवाद की घटनाएं सामने आ रही हैं। 5 किलो आटे की कीमत 560 रुपये पार कर चुकी है, जबकि अच्छी गुणवत्ता वाले चावल 275 रुपये किलो और चना दाल 380 रुपये किलो बिक रही है।
फल-सब्जियों की कीमत भी छू रही आसमान
पाकिस्तान में केवल अनाज और दाल ही नहीं, बल्कि फल और सब्जियां भी आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। सेब 500 रुपये किलो, एक अंडा 30 रुपये और छह अंडों का पैकेट 145 रुपये में बिक रहा है। बिजली और पानी की किल्लत ने हालात और बदतर कर दिए हैं।
झूठे दावों से जनता को बहकाने की कोशिश
इन विषम परिस्थितियों में भी पाकिस्तानी हुक्मरान भारत से मिली हार को छुपाने और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सच्चाई को दबाने में लगे हुए हैं। जनता को जीत की झूठी कहानियां परोसी जा रही हैं, जबकि हकीकत यह है कि पाकिस्तान की आवाम भूख, प्यास और महंगाई के साए में जी रही है।

