गंगा की लहरों ने शुक्रवार की रात दो जिंदगियां लील लीं। बक्सर जिले में उस वक्त मातम छा गया जब एक स्कॉर्पियो तेज रफ्तार में पुराने गंगा पुल की रेलिंग को चीरती हुई सीधे नदी में जा समाई।
रात करीब 8:30 बजे, जब आमतौर पर लोग घरों को लौट रहे होते हैं, उस समय यह दर्दनाक हादसा हुआ। अंधेरे और अफरातफरी के बीच चीख-पुकार सुनाई दी, लेकिन नदी की गहराई ने सब कुछ शांत कर दिया।
पुलिस और स्थानीय गोताखोरों की मदद से शनिवार सुबह तक दो शव नदी से बाहर निकाले गए— एक था अर्जुन उर्फ झामु सिंह, दूसरा हर्ष कुमार। दोनों युवाओं की मौत ने उनके घरों को गहरे अंधकार में डुबो दिया है। एक मां की गोद सूनी हो गई, और एक पिता की उम्मीदें पानी में बह गईं।
नगर थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह के मुताबिक, “शुक्रवार रात से ही सर्च ऑपरेशन चलाया गया। रात करीब 1 बजे अर्जुन का शव मिला और सुबह वाहन के साथ हर्ष का शव भी निकाला गया।”
अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि गाड़ी में कुल कितने लोग सवार थे। यही अनिश्चितता परिवारवालों को और बेचैन कर रही है। कोई चुप बैठा है, कोई रोते हुए भगवान को पुकार रहा है।
गाड़ी को जब नदी से निकाला गया, तो उसके एयरबैग खुले हुए मिले। इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि टक्कर कितनी जोरदार रही होगी। गाड़ी के साथ गंगा की धारा में बहते सपनों को देख मौके पर मौजूद लोग भी स्तब्ध रह गए।
हादसे की सूचना पर स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे, किसी की आंखों में हैरानी थी, किसी में डर… और कुछ आंखें तो लगातार बहती रहीं।
परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। अर्जुन की मां बेसुध हैं, हर्ष के पिता को लोग संभाल नहीं पा रहे। एक ही पल में दो घरों की दुनिया उजड़ गई।

