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“गणेश चतुर्थी 2025: 92 सालों में कैसे बदला लालबागचा राजा? 1934 से लेकर आज तक के खास संदेश”

गणेश चतुर्थी 2025 के शुभ अवसर पर मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा पंडाल में भगवान गणेश की स्थापना शनिवार 27 अगस्त को हुई। 1934 में कोली मछुआरों और मिल मजदूरों द्वारा स्थापित यह पंडाल आज 92 वर्षों का गौरवशाली इतिहास समेटे हुए है।

लालबागचा राजा न केवल भक्तों के गुब्बारों में सबसे पसंदीदा है बल्कि इसे ‘नवसाला पावणारा गणपती’ यानी मन्नतें पूरी करने वाले बप्पा के रूप में भी जाना जाता है। बीते दशकों में इस पंडाल का स्वरूप और थीम बदलती सामाजिक चेतना और संस्कृति के अनुसार विकसित हुआ है।

शुरुआत 1934 में स्थानीय मछुआरों ने लालबाग बाजार में स्थायी गणपति पंडाल स्थापित करने का प्रण लिया था।

अनेक बार इस पंडाल ने खास थीम और रूप लेकर भक्तों को जुड़े रहने का संदेश दिया, जैसे इस वर्ष की थीम भगवान तिरुपति बालाजी की है।

हर साल इस पंडाल से अनंत चतुर्दशी के दिन भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है, जो वर्षों से दक्षिण मुंबई की सड़कों को श्रद्धा और भक्ति से रंगित करती आई है।

लालबागचा राजा मुंबई का सबसे प्रसिद्ध गणेशम होता है, जहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। बड़े से बड़े नेता, फिल्मी सितारे और उद्योगपति भी यहां आकर आशीर्वाद लेते हैं। इस पंडाल की खास बात यह है कि यहां आने वाले भक्त बिना किसी भेदभाव के समान श्रद्धा से भगवान के दर्शन करते हैं

यह पंडाल महाराष्ट्र के सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन में गहरा असर रखता है। यहां की प्रतिमा और सजावट हर साल कुछ न कुछ नया सोच कर प्रस्तुत की जाती है, जो भक्तों को एक नई अनुभूति देती है।

इस वर्ष गणपति बप्पा के हाथ में चक्र, सिर पर मुकुट और बैंगनी रंग की धोती है, जो भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है।

इस प्रकार लालबागचा राजा महोत्सव 2025 भक्तों के लिए आस्था और सांस्कृतिक पर्व का प्रतीक बनकर उभरा है।

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