राधा अष्टमी, भगवान श्री राधा रानी के जन्मोत्सव के रूप में हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बड़े श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है। इस वर्ष राधा अष्टमी 31 अगस्त 2025 को मनाई जाएगी। इस दिन विशेष पूजा-अर्चना और व्रत करके भक्त राधा-कृष्ण की कृपा पाने का प्रयत्न करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राधा अष्टमी के पावन दिन यदि घर में ये तीन पवित्र वस्तुएं लाई जाएं और पूजा के दौरान उनका सही विधि से प्रयोग किया जाए तो पैसों की तंगी, आर्थिक बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा मिलती है, साथ ही सौभाग्य और धनवृद्धि होती है।
गोमती चक्र – गोमती चक्र को धन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसे पूजा स्थान पर स्थापित करने से आर्थिक स्थिति बेहतर होती है और घर में खुशहाली आती है।
कीमाम (कपूर) – कपूर तंतुओं और वातावरण को शुद्ध करता है, घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है और नकारात्मक प्रभावों को दूर करता है। राधा अष्टमी के दिन कपूर से पूजा स्थल की आजप और हवन करना शुभ रहता है।
तुलसी का पौधा – तुलसी की पूजा धार्मिक नियमों में अत्यंत महत्वपूर्ण है। तुलसी की उपस्थिति से घर में स्वास्थ्य और धन की वृद्धि होती है, साथ ही इसे राधा रानी की आराधना का अनुकूल अंग माना जाता है।
राधा अष्टमी के दिन सुबह 11:05 बजे से दोपहर 1:38 बजे तक का शुभ मुहूर्त पूजा के लिए सबसे उत्तम माना गया है। इस अवसर पर भक्त व्रत रखते हैं और राधा-कृष्ण की भजन-कीर्तन करते हैं। माना जाता है कि इस दिन विधिवत पूजा करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
इस दिन की पूजा से धन संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है, वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है और सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं। इसलिए घर में ये तीन वस्तुएं लाकर राधा अष्टमी की पूजा करने से आर्थिक संकट को टाला जा सकता है और जीवन में खुशहाली बनी रहती है।

