केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश की सड़क और टोल नीति को लेकर कई बड़े एलान किए. गडकरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य न केवल विश्वस्तरीय सड़क नेटवर्क तैयार करना है, बल्कि भारतवासियों को ट्रैफिक, दुर्घटनाओं और अनावश्यक टोल टैक्स से भी राहत पहुंचाना है.
मंत्री गडकरी ने बताया कि अब हाईवे के किनारों पर रहने वाले स्थानीय लोगों को टोल टैक्स से राहत दी जाएगी. इसके लिए स्थानीय निवासी अपना आधार कार्ड दिखाकर टोल पास बनवा सकेंगे, जिसके बाद वे बार-बार टोल क्रॉस करने पर भी टैक्स से छूट पाएंगे. भविष्य में सरकार ने तय किया है कि हर 60 किलोमीटर के भीतर सिर्फ एक टोल प्लाजा होगा, जिससे यात्रियों को बार-बार फीस नहीं चुकानी पड़ेगी.
मंत्री ने स्पष्ट किया कि टोल नीतियों एवं सड़क निर्माण में पारदर्शिता, समय पर निर्णय और टीमवर्क को पहली प्राथमिकता दी जा रही है. गडकरी ने कहा, “मैंने हमेशा सड़क निर्माण को निजी ज़िम्मेदारी के रूप में देखा है. देश के पैसे से बने इन प्रोजेक्ट्स में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.”
गडकरी ने बताया कि बीते वर्षों में सड़क निर्माण के क्षेत्र में भारत ने सात वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए हैं. पूर्वी भारत सहित पूरे देश में हाईवे नेटवर्क का जाल बिछाया जा रहा है. नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में 3 लाख करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिनमें ब्रह्मपुत्र के नीचे टनल, गुवाहाटी रिंग रोड, फ्रंटियर हाईवे समेत कई बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं.
मंत्री ने रोड ऐक्सीडेंट की गंभीर समस्या पर भी चिंता जताई और बताया कि ब्लैक स्पॉट्स (दुर्घटनाजनक क्षेत्र) की पहचान कर सख्त नियम और टेक्नोलॉजी आधारित सुरक्षा उपाय लगाए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि सड़क हादसों में जान गंवाने वालों के लिए कैशलेस ट्रीटमेंट और बचावकर्ता को 25 हजार रुपये पुरस्कार की योजना लागू की है.
इस अवसर पर देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और उद्योग जगत के लीडर्स भी शामिल हुए. पैनल चर्चाओं में सतत विकास, ई-मोबिलिटी, आर्थिक सुधार, और ग्रामीण-सुरक्षित सड़कों पर जोर दिया गया.
कार्यक्रम में गडकरी ने अपने राजनीतिक आदर्श अटल बिहारी वाजपेयी और जॉर्ज फर्नांडिस का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि कैसे ‘मानवीय रिश्ते’ और टीमवर्क राजनीति और व्यापार का सबसे बड़ा हिस्सा होते हैं

