पंजाब में निवेश और पर्यटन को नई गति देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। अमृतसर में करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से एक प्रीमियम ट्राइडेंट होटल बनाया जाएगा, जो न सिर्फ राज्य के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को मजबूत करेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जानकारी देते हुए कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने बताया कि इसके लिए ओबेरॉय ग्रुप और स्प्रिंगएज सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के बीच समझौता (MoU) साइन किया गया है।
प्रस्तावित होटल अमृतसर-तरनतारन रोड पर स्थित होगा और स्वर्ण मंदिर से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर बनाया जाएगा। करीब 3 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाला यह 150 कमरों का लग्जरी होटल शहर के हाई-एंड हॉस्पिटैलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर को एक नई पहचान देगा। इस प्रोजेक्ट के जरिए लगभग 350 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
संजीव अरोड़ा ने बताया कि यह परियोजना ओबेरॉय ग्रुप की अंतरराष्ट्रीय स्तर की लग्जरी हॉस्पिटैलिटी विशेषज्ञता और स्प्रिंगएज सॉल्यूशंस की स्थानीय पकड़ के संयुक्त प्रयास से तैयार की जाएगी। खास बात यह है कि पंजाब में ट्राइडेंट ब्रांड के तहत यह पहला बड़ा ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट होगा, जो राज्य के पर्यटन सेक्टर में एक नई शुरुआत माने जा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में वर्तमान में ट्राइडेंट ब्रांड के 9 होटल संचालित हैं, जबकि ओबेरॉय ग्रुप के कुल 32 होटल हैं और 10 नए प्रोजेक्ट पाइपलाइन में हैं। इस प्रोजेक्ट पर काम जुलाई 2026 से शुरू होने की संभावना है और इसे मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस परियोजना को साकार करने में इन्वेस्ट पंजाब की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिसने पिछले डेढ़ साल से दोनों पक्षों के बीच समन्वय स्थापित कर इस समझौते को अंतिम रूप दिलाया। राज्य सरकार के अनुसार, पंजाब में निवेश का माहौल लगातार बेहतर हो रहा है और वर्ष 2025-26 में 59,448 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड निवेश आकर्षित किया गया है, जिससे लाखों रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि अमृतसर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को देखते हुए यह प्रोजेक्ट पर्यटन को और बढ़ावा देगा। इस तरह के बड़े निवेश न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देते हैं, बल्कि पंजाब को प्रीमियम पर्यटन और निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

