जयपुर — राजस्थान की प्रशासनिक मशीनरी में एक नया विवाद गर्माया है। राज्य सरकार ने छोटू लाल शर्मा (बैच 2015, Rajasthan Administrative Service) को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। यह कार्रवाई उस वायरल वीडियो के बाद हुई है, जिसमें शर्मा को पेट्रोल-सीएनजी पंप पर कर्मचारी से विवाद के दौरान थप्पड़ मारते एवं धमकी देते देखा गया है।
भीलवाड़ा-अजमेर रास्ते पर जसवंतपुरा के एक पेट्रोल-सीएनजी स्टेशन पर मंगलवार शाम का मामला है। विरोध यह था कि शर्मा की गाड़ी पहले कतार में थी लेकिन कर्मचारी ने दूसरी गाड़ी को पहले सीएनजी भर दी। शिकायत है कि इस पर शर्मा भड़क गए और मामला हाथापाई एवं थप्पड़ तक बढ़ा। वीडियो में शर्मा को गुस्से में कहते सुना गया: “मैं एसडीएम हूँ, मैं यहाँ का…” तथा एक कर्मचारी को धक्का और थप्पड़ मारते हुए दिखा गया।
इसी घटना में पत्नी परिवार के साथ थीं। पत्नी — जिनका नाम बताया गया है दीपिका व्यास — ने आरोप लगाया कि पंप कर्मचारी ने उनके प्रति अभद्र व्यवहार किया और उनकी ओर अश्लील टिप्पणी की। विवाद के बाद पंप मालिक ने तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार कराया गया।
राजस्थान सरकार ने इसे प्रशासनिक कारणों से निलंबन योग्य पाया। निलंबन आदेश में कहा गया है कि शर्मा, इस अवधि में, जयपुर स्थित सचिवालय-कार्मिक विभाग के कार्यालय में रिमांड पर रहेंगे। आदेश के अनुसार यह कार्रवाई Rajasthan Civil Services (Classification, Control & Appeal) Rules, 1958 की धारा 13 के अंतर्गत हुई है।
वहीं इस विवाद के बीच शर्मा की पहली पत्नी पूनम शर्मा ने मीडिया के सामने आते हुए कई निजी तथ्य साझा किए हैं, जिनमें उन्होंने बताया कि —
2008 में उनकी शादी हुई थी, और प्रारंभ में दोनों ने संघर्ष भरे समय में साथ दिया।
अफसर बनने के बाद छोटे-बड़े झगड़े शुरू हुए, संघर्षों के बावजूद उन्होंने विश्वास रखा कि बदलाव आएगा।
फिर उन्हें लगा कि शर्मा दूसरे संबंधों में आए और घर-परिवार से दूरी बना ली। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके दो बच्चों के बाद, कोरोना युग में बच्चों को दूर पिलानी भेजा गया और उनसे संपर्क कम हुआ।
पूनम ने कहा है कि उन्हें नकली हस्ताक्षर के साथ तलाक की चिट्ठी भेजी गई, और वह आज भी कानूनी रूप से पहली पत्नी बनी हुई हैं।
पूछे जाने वाले सवाल
क्या अधिकारी का यह व्यवहार पद की गरिमा के अनुरूप था? वायरल वीडियो ने जनता में भारी आक्रोश खड़ा किया है।
क्या वहीं पंप कर्मचारी या मालिक ने उचित प्रक्रिया का पालन किया था? विवाद के दो पहलू सामने आए हैं।
इस घटना के बाद प्रशासन में भरोसा और जवाबदेही का प्रश्न उठ गया है।
अफसर के निजी जीवन से जुड़ी बातें सार्वजनिक हो रही हैं– क्या इससे प्रशासन की छवि प्रभावित होगी?
प्राधिकरण ने मामले की जांच प्रारंभ कर दी है। पंप कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई चल रही है। आरोप-प्रत्यारोप के बीच कार्यालयीय कार्रवाई जारी रहेगी। निलंबन के बाद यदि दोष पाए जाते हैं, तो आगे शासनात्मक या विधिक कार्रवाई भी हो सकती है।

