धार्मिक नगरी उज्जैन में इन दिनों किन्नर अखाड़े की ओर से सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों को लेकर दो दिवसीय बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में देश-विदेश से किन्नर समुदाय के साधु-संत शामिल हुए हैं। बैठक के दौरान नए महामंडलेश्वर और श्री महंत बनाए जाने के साथ-साथ अलग-अलग स्थानों पर होने वाले कुंभ की जिम्मेदारियां भी संतों को सौंपी जा रही हैं।
बैठक के दौरान किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि आगामी सिंहस्थ 2028 में किन्नर अखाड़ा अब अकेले शाही स्नान नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि किन्नर अखाड़ा इस बार जूना अखाड़ा के साथ मिलकर स्नान करेगा। उनके अनुसार साल 2019 में ही जूना अखाड़े के साथ एक समझौता किया गया था, जिसके तहत अब जहां जूना अखाड़ा स्नान करेगा, वहीं किन्नर अखाड़ा भी उसी घाट पर स्नान करेगा।
लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने बताया कि किन्नर अखाड़ा लगातार विस्तार कर रहा है और इसमें महामंडलेश्वर और श्री महंतों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि उज्जैन में आयोजित इस बैठक में तमिलनाडु, कन्याकुमारी, उड़ीसा, महाराष्ट्र और गुजरात के साथ-साथ बैंकॉक, थाईलैंड और अमेरिका से भी किन्नर समुदाय के सदस्य शामिल होने पहुंचे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सभी बड़े अखाड़ों के पास अपनी जमीन और आश्रम हैं, लेकिन किन्नर अखाड़ा अभी भी ऐसा अखाड़ा है जिसके पास न तो अपनी जमीन है और न ही कोई स्थायी आश्रम। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने कहा कि जल्द ही वे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात करेंगे और अन्य अखाड़ों की तरह किन्नर अखाड़े के लिए भी आश्रम बनाने हेतु जमीन उपलब्ध कराने की मांग करेंगे।
बैठक के दौरान धार्मिक वातावरण देखने को मिला, जहां संतों ने भगवान की आराधना के लिए नृत्य भी किया। महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने बताया कि किन्नर स्वयं को अर्धनारीश्वर का स्वरूप मानते हैं, इसलिए वे नृत्य के माध्यम से भगवान की भक्ति और आराधना करते हैं। इसी परंपरा के तहत बैठक के दौरान किन्नर संतों ने भक्ति नृत्य की प्रस्तुति भी दी।

