अयोध्या के राजघाट क्षेत्र में आयोजित लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक पंडाल में भीषण आग लग गई। यह महायज्ञ परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा था और कार्यक्रम का समापन होना था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हवन के दौरान तेज हवा के कारण उठी चिंगारी ने कुछ ही देर में आग का रूप ले लिया, जिससे पूरा पंडाल धू-धू कर जलने लगा।
घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। इस हादसे में तीन लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, एंबुलेंस की मदद से कुल चार लोगों को इलाज के लिए भेजा गया, जिनमें तीन की हालत ज्यादा गंभीर बताई जा रही है।
जिला प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर तुरंत पंडाल को खाली कराया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फंडे ने बताया कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई है और सभी श्रद्धालु सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।
इस घटना के दौरान यज्ञशाला से करीब 700 मीटर दूर भी आग लगने की सूचना मिली, जहां आग कैसे पहुंची, इसका स्पष्ट कारण अभी सामने नहीं आया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हवन की चिंगारी से पास की गौशाला में भी आग फैल गई थी।
मौके पर पहुंचे एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने बताया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और पूरे मामले की जांच के लिए टीमों को अलर्ट कर दिया गया है। घटना के बाद श्रद्धालुओं में आक्रोश भी देखने को मिला, हालांकि प्रशासन ने स्थिति को संभाल लिया।
बताया जा रहा है कि यह 9 दिवसीय महायज्ञ था, जिसकी पूर्णाहुति घटना से करीब डेढ़ घंटे पहले ही हो चुकी थी। दयाशंकर सिंह ने कहा कि जब आग लगी, उस समय यज्ञशाला लगभग खाली हो चुकी थी, जिससे किसी बड़ी जनहानि से बचाव हो सका। प्रशासन अब पूरे मामले की गहन जांच कर रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

