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अखिलेश यादव की रैली में उमड़ा जनसैलाब, 50 जिलों से पहुंचे समर्थक

ग्रेटर नोएडा के मिहिर भोज ग्राउंड में रविवार को अखिलेश यादव की अगुवाई में समाजवादी पार्टी ने एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया, जिसने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज कर दी। इस रैली में प्रदेश के 50 से अधिक जिलों से भारी संख्या में लोग पहुंचे, जिससे पूरा मैदान खचाखच भर गया। खासतौर पर बुलंदशहर, अलीगढ़ और खुर्जा से आए युवाओं और किसानों के काफिलों ने दादरी क्षेत्र को पूरी तरह सपा के रंग में रंग दिया।

यह रैली भावनात्मक रूप से भी बेहद खास रही, क्योंकि इसी मैदान पर कभी मुलायम सिंह यादव ने जनसभा को संबोधित किया था। अब उसी स्थान से उनके बेटे अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने की कोशिश की। समर्थकों की भारी भीड़ और जोश को देखकर पार्टी नेताओं में उत्साह देखने को मिला, वहीं विपक्षी खेमे में बेचैनी साफ नजर आई।

अपने संबोधन में अखिलेश यादव ने इसे ‘बदलाव की आहट’ बताते हुए कार्यकर्ताओं और जनता से एकजुट होकर आगामी चुनावों के लिए तैयार रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद इस तरह की बड़ी जनसभा ने यह संकेत दिया है कि समाजवादी पार्टी पश्चिमी यूपी में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है और आने वाले चुनावों में बड़ा असर डाल सकती है।

रैली के बाद अखिलेश यादव हेलीकॉप्टर से बादलपुर स्थित पार्टी नेता गजराज नागर के आवास पहुंचे, जहां उन्होंने करीब एक घंटे तक रुककर परिजनों के साथ समय बिताया। इस दौरान रैली की वजह से जीटी रोड पर दादरी तिराहे से केजीपी तक करीब 5 किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिससे आम लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

इस कार्यक्रम में सांसद हरीश पाल की अध्यक्षता में कई प्रमुख नेता शामिल हुए, जिनमें धर्मेंद्र यादव, हरेन्द्र मलिक, इकरा हसन और विधायक अतुल प्रधान जैसे नाम प्रमुख रहे। रैली के समापन के बाद विपक्षी खेमे में खाली कुर्सियों की तस्वीरें लेने की होड़ भी देखने को मिली।

अपने भाषण में अखिलेश यादव ने युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने अग्निवीर योजना की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी सरकार बनने पर इसे समाप्त कर सेना में स्थायी भर्ती की व्यवस्था बहाल की जाएगी। इसके अलावा उन्होंने पेपर लीक मामलों को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है और सत्ता में आने पर इसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी।

अखिलेश यादव ने शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर भी सरकार को घेरा और याद दिलाया कि उनकी सरकार ने युवाओं को डिजिटल बनाने के लिए लैपटॉप वितरित किए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर रही है, जबकि देश के भविष्य के लिए मजबूत शिक्षा व्यवस्था बेहद जरूरी है।

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