असम विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने आगामी चुनावों को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि इस बार भी राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बनेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि उनकी पार्टी 126 सदस्यीय विधानसभा में 96 से 100 सीटों पर जीत हासिल करेगी, जबकि कांग्रेस को 15 से 20 सीटें मिल सकती हैं और अन्य दलों को सीमित सफलता ही मिलेगी।
असम में सभी 126 सीटों पर 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। राज्य में बहुमत का आंकड़ा 64 सीटों का है। पिछले चुनावों की बात करें तो 2021 में एनडीए गठबंधन ने 75 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, जबकि कांग्रेस गठबंधन को 50 सीटें मिली थीं। बीते 10 वर्षों से राज्य में एनडीए की सरकार कायम है और इस बार भी पार्टी अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने का दावा कर रही है।
चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपना घोषणापत्र भी जारी कर दिया है, जिसे केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया। इस ‘संकल्प पत्र’ में कुल 31 वादे शामिल हैं, जिनमें अवैध कब्जों को हटाने, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि अगर भाजपा दोबारा सत्ता में आती है तो तीन महीने के भीतर राज्य में यूसीसी लागू किया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने अवैध घुसपैठ और जमीन पर कब्जे के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि सरकार ऐसे मामलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी और राज्य की जमीन को वापस लेने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि सीमा से जुड़े मुद्दों के कारण घुसपैठ एक चुनौती बनी रहती है और इससे निपटने के लिए लगातार प्रयास जरूरी हैं। चुनावी माहौल के बीच इस तरह के बयानों से साफ है कि इस बार असम का चुनाव विकास, कानून व्यवस्था और पहचान जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहने वाला है।
अब नजर 9 अप्रैल को होने वाले मतदान और 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी है, जो तय करेंगे कि असम में सत्ता की बागडोर किसके हाथ में जाएगी।

