पंजाब में आम आदमी पार्टी के नेताओं पर लगातार हो रही प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। राज्यसभा सांसद Ashok Mittal (अशोक मित्तल) के बाद अब कैबिनेट मंत्री Sanjeev Arora (संजीव अरोड़ा) के ठिकानों पर भी Enforcement Directorate (ईडी) की छापेमारी हुई है। तीन दिन के भीतर दो बड़े नेताओं पर हुई इस कार्रवाई को लेकर आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।
पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal (अरविंद केजरीवाल) ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लगातार आप नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है और यह पूरा देश देख रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अब तक जितनी भी छापेमारी हुई है, उनमें कितना काला धन बरामद हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि एक रुपया भी मिला है तो सरकार को जनता के सामने रखना चाहिए।
केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि देश में बेरोजगारी बढ़ रही है, अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है, लेकिन सरकार विपक्षी नेताओं के खिलाफ एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने इसे “सत्ता के लिए ओछी राजनीति” करार दिया।
वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann (भगवंत मान) ने भी इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईडी की छापेमारी सिर्फ उन्हीं राज्यों में क्यों हो रही है, जहां भाजपा की सरकार नहीं है। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए कहा कि पंजाब के लोग ऐसे दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं।
आप के वरिष्ठ नेता Sanjay Singh (संजय सिंह) ने भी इस कार्रवाई को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले इस तरह की कार्रवाई राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा है और इसे “तानाशाही” बताया। वहीं दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष Saurabh Bharadwaj (सौरभ भारद्वाज) ने इसे एक पैटर्न बताते हुए कहा कि भाजपा चुनाव से पहले इसी तरह विपक्षी दलों को निशाना बनाती है।
इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी की नेता Atishi Marlena (आतिशी) ने भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि चुनाव से पहले पार्टी के नेताओं को टारगेट किया जा रहा है। उन्होंने इसे भाजपा की “घबराहट और हार का डर” बताया। वहीं पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने भी इस कार्रवाई को लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए कड़ी आलोचना की।
लगातार हो रही इन कार्रवाइयों के बाद पंजाब की राजनीति में तनाव बढ़ गया है। जहां एक ओर जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया बता रही हैं, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दे रहा है। आने वाले चुनावों से पहले इस मुद्दे पर सियासी घमासान और तेज होने की संभावना है।

