जबलपुर के बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में कई परिवारों की खुशियां पल भर में उजड़ गईं, लेकिन सबसे ज्यादा मार्मिक कहानी दिल्ली के एक परिवार की सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं।
दिल्ली के रहने वाले प्रदीप मेसी, उनकी पत्नी मरीना मेसी और उनका 4 साल का बेटा त्रिशान इस क्रूज यात्रा पर खुशियां मनाने आए थे। गुरुवार की शाम सब कुछ सामान्य था, लेकिन अचानक मौसम ने करवट ली और तेज हवाओं के साथ लहरें उफान पर आ गईं। देखते ही देखते हालात बिगड़ गए और कुछ ही क्षणों में क्रूज हादसे का शिकार हो गया। चारों तरफ अफरा-तफरी, चीख-पुकार और जान बचाने की जद्दोजहद शुरू हो गई।
इसी भयावह स्थिति के बीच मरीना मेसी ने जो किया, वह एक मां के प्रेम और त्याग की मिसाल बन गया। जब पानी तेजी से क्रूज में भरने लगा, तब उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना अपने बेटे त्रिशान को सीने से कसकर लगा लिया और उसे लाइफ जैकेट के भीतर सुरक्षित रखने की कोशिश करती रहीं। लहरों के तेज थपेड़ों और डूबती सांसों के बीच भी उनकी पकड़ ढीली नहीं हुई।
करीब 14 घंटे बाद जब राहत और बचाव टीम मौके पर पहुंची, तो जो दृश्य सामने आया उसने सभी को भावुक कर दिया। गोताखोरों ने पानी के भीतर मरीना और त्रिशान के शव एक-दूसरे से लिपटे हुए पाए। मां ने आखिरी सांस तक अपने बच्चे को ऐसे थामे रखा था मानो वह अब भी उसे बचाने की कोशिश कर रही हों। दोनों के शवों को अलग करने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ी।
शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद जब शव प्रदीप मेसी को सौंपे गए, तो अस्पताल का माहौल बेहद भावुक हो गया। अपने बेटे और पत्नी को इस हालत में देखकर प्रदीप टूट गए। वे बार-बार अपने बेटे को उठाने की कोशिश करते हुए कहते रहे, “राजा बेटा उठ जा… देख पापा आ गए हैं…” उनकी यह पुकार वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गई।
इस हादसे ने केवल एक परिवार को नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों के अनुसार, सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त नहीं थे। लाइफ जैकेट्स समय पर उपलब्ध नहीं थीं, जबकि खराब मौसम के बावजूद क्रूज को बीच पानी में ले जाया गया। बताया जा रहा है कि क्रूज में क्षमता से अधिक लोग सवार थे, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
अब प्रदीप मेसी अपनी बेटी के साथ अकेले दिल्ली लौटेंगे। उनके पास सिर्फ यादें रह गई हैं—एक ऐसी पत्नी की, जिसने अपने बेटे के लिए अपनी जान दे दी, और एक मासूम बेटे की, जिसकी जिंदगी अधूरी रह गई। बरगी डैम की लहरें भले ही अब शांत हो गई हों, लेकिन मां-बेटे के इस अटूट रिश्ते और बलिदान की कहानी हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी।

