अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि को लेकर उठे विवाद की जांच लगातार तीसरे दिन भी जारी है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) मामले के हर पहलू की गहन पड़ताल कर रहा है। जांच टीम ने मंगलवार को मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, व्यवस्थापक गोपाल राव समेत नकदी गणना और दान प्रबंधन से जुड़े कई कर्मचारियों से विस्तृत पूछताछ की। आज भी जांच दल कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर संबंधित लोगों से जानकारी जुटाने में लगा है।
जांच का नेतृत्व कर रहे लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के साथ आईजी किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरतन कुमार ने अलग-अलग स्तर पर पूछताछ की। जांच को निष्पक्ष और गोपनीय बनाए रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों को इस प्रक्रिया से अलग रखा गया है। SIT यह जानने का प्रयास कर रही है कि मंदिर में प्राप्त दान राशि के संग्रहण, गणना और बैंक में जमा होने तक की पूरी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और सुरक्षित रही है।
जांच दल ने मंदिर परिसर में स्थापित दानपात्रों का भी निरीक्षण किया। इस दौरान दानपात्रों की संख्या, उनकी सुरक्षा व्यवस्था और उनसे संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा की गई। टीम ने नकदी गणना से जुड़े दस्तावेज, ड्यूटी रजिस्टर, सीसीटीवी फुटेज और बैंक जमा प्रक्रिया से जुड़े अभिलेखों की भी बारीकी से जांच की। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि दान राशि की निगरानी किस स्तर पर होती है और कथित अनियमितता की संभावना किस चरण में उत्पन्न हो सकती है।
SIT ने रामलला के गर्भगृह के सामने स्थित उस विशेष कक्ष का भी निरीक्षण किया, जहां श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं सुरक्षित रखी जाती हैं। इस कक्ष की जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मचारी से भी विस्तृत पूछताछ की गई। जांच दल ने सुरक्षा मानकों, रिकॉर्ड रखरखाव और कीमती वस्तुओं के संरक्षण की व्यवस्था की जानकारी जुटाई।
मंगलवार को सुबह मंदिर परिसर पहुंची SIT ने सबसे पहले चंपत राय से पूछताछ की। उनसे नकदी गणना में शामिल कर्मचारियों की नियुक्ति, निगरानी तंत्र और जवाबदेही से जुड़े सवाल पूछे गए। इसके बाद व्यवस्थापक गोपाल राव से मंदिर की आंतरिक व्यवस्थाओं और दान राशि के प्रबंधन को लेकर जानकारी ली गई। सूत्रों के अनुसार जांच टीम यह समझने की कोशिश कर रही है कि दानपात्रों से नकदी निकलने से लेकर बैंक में जमा होने तक की प्रक्रिया में कौन-कौन जिम्मेदार था और निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।
पूछताछ के दौरान जांच दल को बताया गया कि दानपात्रों से प्राप्त नकदी की गणना में ट्रस्ट, भारतीय स्टेट बैंक और कलेक्शन एजेंसी से जुड़े लगभग 40 कर्मचारी शामिल रहते हैं। ये कर्मचारी दो शिफ्टों में काम करते हैं। जानकारी के मुताबिक कलेक्शन एजेंसी की भूमिका केवल दानपात्रों से नकदी निकालकर उसे निर्धारित गोपनीय कक्ष तक पहुंचाने की होती है, जबकि आगे की प्रक्रिया अलग निगरानी व्यवस्था के तहत पूरी की जाती है।
राम मंदिर में दान राशि को लेकर उठे विवाद के बाद यह जांच काफी अहम मानी जा रही है। श्रद्धालुओं की आस्था और ट्रस्ट की पारदर्शिता से जुड़े इस मामले में SIT सभी तथ्यों को खंगाल रही है। जांच पूरी होने के बाद टीम अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

