मुजफ्फरनगर में राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) की मीरापुर से नवनिर्वाचित विधायक मिथिलेश पाल और 14 अन्य व्यक्तियों के खिलाफ यातायात बाधित करने के एक मामले में शुक्रवार को विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट में पेशी हुई। कोर्ट ने इन सभी के खिलाफ आरोप तय किए हैं।
अदालत के सूत्रों के मुताबिक, विशेष न्यायाधीश देवेंद्र सिंह फौजदार ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 147 (दंगा), 148 (घातक हथियारों के साथ दंगा करना) और 342 (बंधक बनाना) के तहत आरोप लगाए। इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 3 जनवरी 2025 निर्धारित की गई है।
विधायक के वकील किरणपाल ने जानकारी दी कि यह मामला 25 फरवरी 2019 का है, जब सिविल लाइंस थाने में मिथिलेश पाल समेत 15 लोगों पर ट्रैफिक जाम करने को लेकर केस दर्ज किया गया था। आरोप है कि विरोध प्रदर्शन के चलते महावीर चौक पर गंभीर ट्रैफिक बाधा उत्पन्न हुई थी। विधायक और अन्य ने धनगर जाति को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग को लेकर धरना दिया था, जिसके कारण सड़क जाम हो गई थी।
मिथिलेश पाल ने हाल ही में मीरापुर विधानसभा उपचुनाव में जीत हासिल की है। उपचुनाव के नतीजे 23 नवंबर को घोषित हुए थे। इससे पहले, 2012 में उन्होंने रालोद के टिकट पर मीरापुर से चुनाव लड़ा था, लेकिन बसपा के जमील अहमद कासमी से हार गई थीं। 2017 में भी उन्होंने इस सीट से चुनाव लड़ा, परंतु तीसरे स्थान पर रहीं और बीजेपी के अवतार सिंह भड़ाना ने उन्हें हराया था। अब विधायक बनने के बाद, उनके खिलाफ एमपी/एमएलए कोर्ट में दंगा और बंधक बनाने जैसे गंभीर आरोपों पर सुनवाई शुरू हो गई है। अदालत ने मामले में आरोप तय कर दिए हैं, और अब आगे की कानूनी प्रक्रिया चल रही है।

