कांग्रेस बीते दस सालों से राष्ट्रीय सत्ता से दूर है और राज्यों में भी उसका प्रभाव लगातार कम होता जा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को भारी हार का सामना करना पड़ा। इन हारों से हताश कांग्रेस अब कर्नाटक के बेलगावी में 26-27 दिसंबर को अपनी कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की विशेष बैठक करने जा रही है। इस दो दिवसीय बैठक में कांग्रेस अपने संगठन की कमजोरियों पर आत्ममंथन करने के साथ-साथ देश की राजनीति में पुनः अपना प्रभाव बढ़ाने की रणनीति तैयार करेगी।
बैठक का उद्देश्य न केवल संगठन को मजबूत करना है, बल्कि भाजपा और मोदी सरकार को घेरने के लिए नई रणनीतियों पर विचार करना भी है।
2024 के बाद फिर हताशा क्यों?
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 99 सीटें जीतकर वापसी की उम्मीदें जगाईं, लेकिन हरियाणा और महाराष्ट्र में हार के बाद पार्टी के नेतृत्व और चुनावी रणनीतियों पर सवाल उठने लगे। इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों ने भी कांग्रेस के नेतृत्व पर प्रश्न उठाए और गठबंधन की कमान ममता बनर्जी को सौंपने की मांग की।
इस राजनीतिक दबाव के बीच, बेलगावी की बैठक कांग्रेस के लिए अहम हो जाती है, जहां पार्टी को न केवल अपनी रणनीतियों पर आत्ममंथन करना होगा, बल्कि सहयोगी दलों और जनता के बीच भरोसा बहाल करने का भी प्रयास करना होगा।
संगठनात्मक सुधार और नई रणनीतियां
यह बैठक महात्मा गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने की 100वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में बुलाई गई है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि यह बैठक 2022 के उदयपुर चिंतन शिविर की तरह अहम होगी। उदयपुर में ही भारत जोड़ो यात्रा की योजना बनाई गई थी, जिससे राहुल गांधी ने देशभर में जनता से संवाद स्थापित कर पार्टी में नई ऊर्जा भरी। बेलगावी की बैठक में भी कांग्रेस अगले एक साल के लिए अपनी कार्ययोजनाएं तय करेगी।
बैठक में दो अहम प्रस्ताव पारित किए जा सकते हैं। पहला, मोदी सरकार की नीतियों के कारण बढ़ती आर्थिक असमानता, संवैधानिक संस्थाओं पर हमले और सामाजिक विभाजन के मुद्दों पर। दूसरा प्रस्ताव, बाबा साहेब अंबेडकर के अपमान के आरोपों से संबंधित हो सकता है। इसके जरिए कांग्रेस दलित समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेगी।
गांधी और अंबेडकर के सहारे आगे बढ़ने की योजना
बैठक का नाम ‘नव सत्याग्रह’ रखा गया है, जो महात्मा गांधी की विरासत से जुड़ा है। बैठक के बाद कांग्रेस 27 दिसंबर को ‘जय बापू, जय भीम, जय संविधान’ के नारे के साथ एक रैली भी आयोजित करेगी। कांग्रेस अब गांधी और अंबेडकर की सियासी विरासत को जोड़कर भाजपा के खिलाफ अपना एजेंडा पेश करना चाहती है।
क्षेत्रीय दलों और गठबंधन का दबाव
कांग्रेस की सीडब्ल्यूसी बैठक ऐसे समय हो रही है, जब इंडिया गठबंधन में नेतृत्व को लेकर खींचतान जारी है। लालू प्रसाद यादव, शरद पवार और अखिलेश यादव जैसे नेताओं ने ममता बनर्जी को गठबंधन का चेहरा बनाने का सुझाव दिया है। इसके अलावा, कांग्रेस को आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस जैसे क्षेत्रीय दलों की चुनौती भी मिल रही है।
अगले चुनावों की तैयारी जरूरी
2025 में दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनाव होने हैं, जबकि 2026 में असम, पश्चिम बंगाल और केरल जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव होंगे। इन राज्यों में कांग्रेस को भाजपा के अलावा क्षेत्रीय दलों से भी मुकाबला करना होगा। ऐसे में कांग्रेस को एक स्पष्ट और ठोस रणनीति तैयार करनी होगी।
कांग्रेस के कायाकल्प की राह
बेलगावी की बैठक से कांग्रेस को अपनी संगठनात्मक कमियों को पहचानकर, उन्हें दूर करने के लिए एक निश्चित समयसीमा में कार्य करना होगा। कमजोर संगठन के साथ विपक्षी गठबंधन को मजबूत करना मुश्किल होगा। पार्टी को अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने के लिए उत्तर भारत जैसे बड़े क्षेत्रों में अपना प्रभाव बढ़ाना होगा।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस बेलगावी बैठक में केवल विचार-विमर्श तक सीमित रहती है या जमीनी स्तर पर अपनी ताकत बढ़ाने की ठोस रणनीति लेकर आगे बढ़ती है।

