उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 1978 के दंगों के दौरान विस्थापित हुए एक हिंदू परिवार को लगभग 47 साल बाद अपनी खोई हुई संपत्ति वापस मिल गई। दंगों में बलराम माली की हत्या के बाद उनके परिवार को अपनी जमीन और घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। अब प्रशासन ने उनकी 15,000 वर्ग फीट की जमीन पर कब्जा दिलाने का काम किया है, जिस पर वर्षों से एक स्कूल संचालित हो रहा था।
दंगों के बाद बलराम माली के तीनों बेटे अलग-अलग जगहों पर जाकर बस गए। रामभरोसे ने अपनी बहन के घर नरौली में शरण ली, नन्हूमल चंदौसी में रहने लगे, जबकि तुलसीराम संभल में किराए के मकान में रहने लगे। वर्षों तक यह परिवार अपनी जमीन और घर से जुड़ी उम्मीदें खो चुका था।
हालांकि, 24 नवंबर 2024 के बाद प्रशासन द्वारा मामले पर ध्यान देने के बाद स्थिति बदल गई। रामभरोसे के परिवार ने अधिकारियों से संपर्क किया और अपनी समस्या को उठाया। जांच में पाया गया कि उनकी जमीन पर डॉ. शाबेज द्वारा संचालित “आजाद जन्नत निशा कन्या माध्यमिक विद्यालय” चल रहा था।
मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम वंदना मिश्रा ने कार्रवाई शुरू की। उन्होंने सुनिश्चित किया कि परिवार को उनकी जमीन वापस दिलाई जाए। प्रशासन ने 15,000 वर्ग फीट में से 10,000 वर्ग फीट जमीन पर परिवार का कब्जा दिला दिया।
एसडीएम वंदना मिश्रा ने कहा कि यह कदम न केवल परिवार को न्याय दिलाने के लिए था, बल्कि समाज को यह संदेश देने के लिए भी है कि अवैध कब्जों को सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन हमेशा पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
47 साल बाद न्याय मिलने से परिवार के साथ-साथ समाज के लोगों में भी प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा है। यह घटना दर्शाती है कि सही समय पर उचित कदम उठाने से न्याय संभव है

