जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकवादियों से जुड़े मामलों में कड़ी कार्रवाई करते हुए तीन सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है। इन कर्मचारियों में जम्मू-कश्मीर पुलिस का कांस्टेबल फिरदौस भट्ट, वन विभाग का अर्दली निसार अहमद खान और शिक्षक अशरफ भट्ट शामिल हैं।
फिरदौस भट्ट, जो 2005 में एसपीओ के रूप में भर्ती हुआ था और 2011 में कांस्टेबल बना, लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम कर रहा था। उसे मई 2024 में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस जांच में सामने आया कि उसने आतंकवादियों को हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध कराया था।
वन विभाग में सहायक के तौर पर भर्ती हुआ निसार अहमद खान गुप्त रूप से हिजबुल मुजाहिदीन के लिए काम कर रहा था। वह 2000 में हुए एक बम धमाके में शामिल था, जिसमें तत्कालीन बिजली मंत्री गुलाम हसन भट की मौत हुई थी।
शिक्षक अशरफ भट्ट को 2008 में नौकरी मिली, लेकिन उसने लश्कर-ए-तैयबा की विचारधारा को अपनाकर आतंकियों की मदद करनी शुरू कर दी। जांच में सामने आया कि वह पाकिस्तान में बैठे लश्कर आतंकवादी मोहम्मद कासिम के संपर्क में था और युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का काम कर रहा था।
यह कार्रवाई उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में हुई सुरक्षा समीक्षा बैठक के बाद की गई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आतंकवादियों और उनके समर्थकों को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे आतंकवाद के खिलाफ कठोर कदम उठाएं।
सरकार के इस फैसले से यह साफ हो गया है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के किसी भी रूप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और देश के खिलाफ साजिश करने वालों पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

