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मध्य पूर्व में बढ़ सकता है बड़ा संघर्ष, ईरान पर इजरायल के हमले की आशंका तेज, अमेरिका ने दूतावासों से हटाए अपने राजनयिक

मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े भूचाल की दहलीज पर खड़ा नजर आ रहा है। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल किसी भी समय ईरान पर बड़ा सैन्य हमला कर सकता है। खास बात यह है कि इस बार इजरायल संभवतः अमेरिका की प्रत्यक्ष मदद के बिना ही यह कार्रवाई करने की योजना बना रहा है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और अधिक बढ़ सकता है। इजरायल के संभावित हमले को लेकर अमेरिका ने कड़े कदम उठाए हैं। इराक, बहरीन और कुवैत जैसे प्रमुख मध्य-पूर्वी देशों से अमेरिकी राजनयिकों को वापस बुला लिया गया है। इसके साथ ही ट्रैवल एडवाइजरी भी जारी की गई है। जानकारों का मानना है कि यह कदम इजरायल के संभावित हमले और उसके बाद ईरान की प्रतिक्रिया के डर से उठाया गया है। बताया जा रहा है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फोन कर इस हमले को टालने की अपील की थी। ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को दोबारा जीवित किया जाए। लेकिन इजरायल का रुख साफ है—वह ईरान को किसी भी हाल में यूरेनियम संवर्धन की मंजूरी नहीं देगा। इजरायल की चिंता यह है कि ईरान अगर यूरेनियम का भंडार बढ़ाता रहा, तो वह जल्द ही परमाणु हथियार बनाने में सक्षम हो जाएगा। यही कारण है कि वह किसी भी तरह से ईरान की परमाणु प्रगति को रोकने के लिए तैयार दिख रहा है, चाहे इसके लिए अकेले ही कार्रवाई क्यों न करनी पड़े। अगर इजरायल हमला करता है, तो यह सिर्फ ईरान और इजरायल के बीच का मामला नहीं रहेगा। इससे पूरा मिडल ईस्ट जल सकता है, जिसमें अन्य देश भी खिंच सकते हैं। ईरान की तरफ से जवाबी हमले की संभावना को नकारा नहीं जा सकता और इसके परिणाम वैश्विक स्तर पर भी गंभीर हो सकते हैं। मध्य पूर्व में तनाव तेजी से बढ़ रहा है। अमेरिका का अपने राजनयिकों को हटाना और इजरायल का स्पष्ट रुख इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या इजरायल हमला करेगा या फिर कूटनीतिक रास्ता बचा है।

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