पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गया है। शुक्रवार देर रात ईरान ने इजरायल पर अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला किया। यह जवाबी कार्रवाई सीरिया में ईरानी कूटनीतिक ठिकाने पर इजरायली हमले के बाद की गई है, जिसमें ईरान के वरिष्ठ रिवोल्यूशनरी गार्ड्स अधिकारी मारे गए थे।इस जवाबी हमले में ईरान ने दो चरणों में लगभग 150 बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें इजरायल की ओर दागीं। इनमें से अधिकतर मिसाइलों को इजरायली डिफेंस सिस्टम और अमेरिकी सहयोग से बीच रास्ते में ही मार गिराया गया, लेकिन कुछ मिसाइलें देश के भीतर जा गिरीं। यरुशलम, तेल अवीव और रमत गान जैसे शहरों में जोरदार धमाके हुए, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।इजरायल के विभिन्न इलाकों में हवाई हमले के सायरन गूंजते रहे और लोगों को तुरंत शेल्टरों में जाने की चेतावनी दी गई। रमत गान में एक रिहायशी इमारत पर मिसाइल गिरने से कई फ्लैट क्षतिग्रस्त हो गए, वहीं तेल अवीव में एक इमारत की ऊपरी मंजिलें बुरी तरह से टूट गईं। अब तक 15 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि की गई है, जिनमें दो की हालत गंभीर बनी हुई है।अमेरिका ने भी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अपने मिसाइल डिफेंस सिस्टम की मदद से इजरायल को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि कई ईरानी मिसाइलों को अमेरिकी यूनिट्स ने उड़ान में ही नष्ट कर दिया।ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इस हमले को जायज ठहराते हुए कहा कि इजरायल ने जो किया, उसका अंजाम भुगतना ही होगा। उन्होंने कहा, “हम अपने शहीदों के खून का हिसाब जरूर लेंगे। ईरान की सेना सतर्क और तैयार है।” इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में भारी बेचैनी और दहशत का माहौल है। संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, रूस और यूरोपीय संघ ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। जानकारों का मानना है कि आने वाले कुछ घंटे इस टकराव की दिशा तय करेंगे – क्या यह युद्ध की ओर बढ़ेगा या बातचीत की कोशिशें होंगी।

