भारत सरकार ने अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त हुए एयर इंडिया बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान के ब्लैक बॉक्स को अमेरिका भेजने का फैसला किया है। हादसे की गंभीरता को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, क्योंकि ब्लैक बॉक्स में आग लगने के कारण डाटा निकालना भारत में संभव नहीं हो पा रहा है।
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, विमान के फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर (FDR) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) को दुर्घटना के समय भारी नुकसान हुआ। उपकरण आग और टक्कर से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे भारतीय विशेषज्ञों के लिए इनमें से डाटा निकालना लगभग असंभव हो गया है। ऐसे में इसे अमेरिका की अत्याधुनिक लैब्स में जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
इस भीषण दुर्घटना में 241 यात्री और जमीन पर मौजूद 33 लोग मारे गए, जो इसे पिछले एक दशक की सबसे बड़ी विमान दुर्घटनाओं में शामिल करता है। भारत की विमान दुर्घटना जांच एजेंसी (AAIB) इस पूरे हादसे की जांच कर रही है, हालांकि अभी तक किसी भी अधिकारी की ओर से इस विषय पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। एयर इंडिया ने भी टिप्पणी से इनकार किया है।
इस त्रासदी के बीच एक अद्भुत किस्सा सामने आया है – रितेश कुमार, जो बिहार के बेगूसराय जिले का रहने वाला है और अहमदाबाद के एक मेडिकल कॉलेज में MBBS का छात्र है।
हादसे के वक्त रितेश कॉलेज की मेस में दोस्तों के साथ खाना खा रहे थे, तभी तेज धमाके के साथ विमान का मलबा उनके ऊपर गिरने लगा। रितेश ने बताया, “हमने जैसे ही खाना शुरू किया, तभी जोरदार आवाज हुई और छत से विमान का हिस्सा गिरने लगा। मेरी समझ बंद हो गई थी, तभी एक टेबल मेरे ऊपर आ गई और उसने मुझे ढक लिया।”
वो टेबल किसी कवच की तरह आई और रितेश की जान बचा गई। फिलहाल रितेश ICU में भर्ती हैं और गहरे सदमे में हैं।
ब्लैक बॉक्स से मिलने वाला डाटा हादसे की असली वजह सामने लाने में अहम भूमिका निभाएगा। फिलहाल भारत-अमेरिका के बीच तकनीकी सहयोग से जांच को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
इस हादसे ने जहां सैकड़ों परिवारों को तोड़ दिया, वहीं कुछ चमत्कारों ने यह भी दिखाया कि ज़िंदगी कभी-कभी एक टेबल के नीचे भी बच सकती है।

