देश की राजधानी एक बार फिर फर्जीवाड़े के भंवर में… दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे शातिर ‘डिग्री माफिया नेटवर्क’ का पर्दाफाश किया है, जिसने न केवल शिक्षा की पवित्रता को कलंकित किया, बल्कि हजारों युवाओं के करियर और सरकारी व्यवस्था को भी खतरे में डाल दिया।
क्राइम ब्रांच ने पांच बड़े आरोपियों को गिरफ्तार किया है और 5000 से ज्यादा फर्जी डिग्रियों का डिजिटल डेटा जब्त किया गया है। ये सभी डिग्रियां B.Tech, B.Pharma, BMS जैसे पेशेवर कोर्सेस की थीं, जिन्हें मोटी रकम लेकर बेचा जाता था।
इस घोटाले का मास्टरमाइंड है विक्की, जो खुद तो सिर्फ दसवीं पास है, लेकिन दिल्ली के नेताजी सुभाष प्लेस में एक फर्जी कॉल सेंटर चलाता था। वहां से वह देशभर के छात्रों को लालच देकर नकली डिग्रियों का झांसा देता था।
उसका नेटवर्क दिल्ली, नोएडा, फरीदाबाद और राजस्थान तक फैला हुआ था। आरोपी विवेक गुप्ता, सतबीर सिंह और नारायण अपने-अपने इलाकों से पूरे ऑपरेशन को संभालते थे। एक आरोपी फिलहाल राजस्थान की जेल में बंद है, लेकिन उसका नेटवर्क अब भी सक्रिय था।
ये आरोपी पहले कोचिंग और स्टूडेंट हब वाले क्षेत्रों की पहचान करते थे, वहां कमरा किराए पर लेकर पंपलेट बांटते या मोबाइल के जरिए संपर्क करते थे। कई बार खुद को स्टूडेंट बनाकर कोचिंग में एडमिशन ले लेते और सीधे छात्रों से संपर्क कर डील फाइनल करते।
हर डिग्री के लिए 1 से 1.5 लाख रुपये की डील होती, और 45 दिन में डिग्री थमा दी जाती।
जांच में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि इन नकली डिग्रियों की मदद से कई युवाओं ने सरकारी और निजी नौकरियों में एंट्री पा ली है। अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है कि कितने लोग इस रैकेट से डिग्री लेकर नौकरियों में बैठे हैं, और वे अभी किन संस्थानों में कार्यरत हैं।
इस मामले ने यह साफ कर दिया है कि भारत की शिक्षा और भर्ती प्रणाली पर ठोस निगरानी की जरूरत है। एक डिजिटल युग में भी नकली डिग्रियां बनाकर करियर, संस्थानों और सिस्टम को प्रभावित किया जा रहा है।
जॉइंट सीपी सुरेंद्र कुमार ने इस पूरे ऑपरेशन को लीड किया और बताया कि रैकेट देशभर में फैला हुआ है, जिसमें मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटीज के नाम पर डिग्रियां बनाई जाती थीं। अब पुलिस जाली डिग्री धारकों की पहचान कर कार्रवाई की तैयारी में जुटी है।
इस पूरे खुलासे के बाद यह स्पष्ट है कि शॉर्टकट की चाहत में करियर नहीं बनता, बल्कि पूरा सिस्टम डगमगाता है। दिल्ली पुलिस ने इस कार्रवाई से सिर्फ एक रैकेट नहीं तोड़ा, बल्कि हजारों छात्रों को यह सिखाया कि जालसाजी के रास्ते कभी भी मंज़िल तक नहीं पहुंचाते।
अब सवाल यह है – क्या हम अपनी शिक्षा को इतना सस्ता होने देंगे? क्या फर्जी डिग्रियों का यह सिलसिला अब भी किसी और शहर में ज़िंदा है?
इसका जवाब आने वाला वक्त और पुलिस की अगली जांच तय करेगी…

